Skip to content
SarvaKosh
संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

Report a copyright issue

DevanagariHindipublished770 pages

Page 725 of 770

Read in context
Page 725
  • उत्तरभाग *
    ७२३

समस्त पितृगण—ये सब-के-सब माघ मासमें त्रिवेणी-स्नानके लिये आते हैं। सत्ययुगमें तो उक्त सभी तीर्थ प्रत्यक्षरूप धारण करके आते थे, किंतु कलियुगमें वे छिपे रूपसे आते हैं। पापियोंके सङ्गदोषसे काले पड़े हुए सम्पूर्ण तीर्थ प्रयागमें माघ मासमें स्नान करनेसे श्वेत वर्णके हो जाते हैं।

मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युत माधव ॥
स्नानेनानेन मे देव यथोक्तफलदो भव।
(ना० उत्तर० ६३। १३-१४)

‘गोविन्द ! अच्युत ! माधव ! देव ! मकर राशिपर सूर्यके रहते हुए माघ मासमें त्रिवेणीके जलमें किये हुए मेरे इस स्नानसे संतुष्ट हो आप शास्त्रोक्त फल देनेवाले हों।’

—इस मन्त्रका उच्चारण करके मौनभावसे स्नान करे। ‘वासुदेव, हरि, कृष्ण और माधव’ आदि नामोंका बार-बार स्मरण करे। मनुष्य अपने घरपर गरम जलसे साठ वर्षोंतक जो स्नान करता है, उसके समान फलकी प्राप्ति सूर्यके मकर राशिपर रहते समय एक बारके स्नानसे हो जाती है। बाहर बावड़ी आदिमें किया हुआ स्नान बारह वर्षोंके स्नानका फल देनेवाला है। पोखरेमें स्नान करनेपर उससे दूना और नदी आदिमें स्नान करनेपर चौगुना फल प्राप्त होता है। देवकुण्डमें वही फल दसगुना और महानदीमें सौगुना होता है। दो महानदियोंके संगममें स्नान करनेपर चार सौ गुने फलकी प्राप्ति होती है; किंतु सूर्यके मकर राशिपर रहते समय प्रयागकी गङ्गामें स्नान करनेमात्रसे वह सारा फल सहस्रगुना होकर मिलता है—ऐसा बताया गया है। इस प्रयाग तीर्थको पूर्वकालमें ब्रह्माजीने प्रकट किया था। जिसके गर्भमें सरस्वती छिपी हैं, वह श्वेत और श्याम जलकी धारा ब्रह्मलोकमें जानेका मार्ग है। हिमालयकी घाटियोंमें जो तीर्थ हैं, उनमें माघ मासका स्नान सब पापोंका नाश करनेवाला है। सब मासोंमें उत्तम माघ मास यदि बदरीवनमें प्राप्त हो तो वह मोक्ष देनेवाला है। नर्मदाके जलमें माघका स्नान पापनाशक, दुःखहारी, सम्पूर्ण मनोवाञ्छित फलोंका दाता तथा रुद्रलोककी प्राप्ति करानेवाला कहा गया है। सरस्वतीके जलमें वह सब पापराशियोंका नाशक तथा सम्पूर्ण लोकोंके सुखोंकी प्राप्ति करानेवाला बताया गया है। गङ्गाका जल यदि माघ मासमें सुलभ हो तो वह पापरूपी ईंधनको जलानेके लिये दावानल, गर्भवासके कष्टका नाश करनेवाला तथा विष्णुलोक एवं मोक्षकी प्राप्ति करानेवाला बताया गया है।

सरयू, गण्डकी, सिन्धु, चन्द्रभागा, कौशिकी, तापी, गोदावरी, भीमा, पयोष्णी, कृष्णवेणी, कावेरी, तुङ्गभद्रा तथा अन्य जो समुद्रगामिनी नदियाँ हैं, उनमें स्नान करनेवाला मनुष्य पापरहित हो स्वर्गलोकमें जाता है। नैमिषारण्यमें माघ-स्नान करनेसे भगवान् विष्णुका सारूप्य प्राप्त होता है। पुष्करमें नहानेसे ब्रह्माका सामीप्य मिलता है। विधिनन्दिनि ! गोमतीमें माघ नहानेसे फिर जन्म नहीं होता। हेमकूट, महाकाल, ॐकार, नीलकण्ठ तथा अर्बुद तीर्थमें माघ मासका स्नान रुद्रलोककी प्राप्ति करानेवाला माना गया है। देवि ! सूर्यके मकर राशिपर रहते समय सम्पूर्ण सरिताओंके संगममें माघ-स्नान करनेसे सम्पूर्ण कामनाओंकी प्राप्ति होती है। स्वर्गवासी देवता सदा यह गाया करते हैं कि ‘क्या प्रयागमें कभी माघ मास हमें मिलेगा, जहाँ स्नान करनेवाले मानव फिर कभी गर्भकी वेदनाका अनुभव नहीं करते और भगवान् विष्णुके समीप स्थित होते हैं।’ जल और वायु पीकर रहने, पत्ते चबाने, देह सुखाने, दीर्घकालतक घोर तपस्या करने और योग साधनेसे मनुष्य जिस गतिको प्राप्त होते हैं, उसे प्रयागके स्नानमात्रसे ही पा लेते हैं। प्रयागमण्डलका विस्तार पाँच योजन है। सुभगे ! वहाँ तीन कुण्ड हैं। उनके बीचमें