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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

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DevanagariHindipublished770 pages

Page 596 of 770

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Page 596

५९४ * संक्षिप्त नारदपुराण *


इन्द्र, सिद्धोंमें कपिल, पुरोहितोंमें बृहस्पति, कवियोंमें शुक्राचार्य, पाण्डवोंमें अर्जुन, दास्य-भक्तोंमें हनुमान्, तृणोंमें कुश, इन्द्रियोंमें मन (चित्त), गन्धर्वोंमें चित्ररथ, पुष्पोंमें कमल, अप्सराओंमें उर्वशी तथा धातुओंमें सुवर्ण श्रेष्ठ है। जिस प्रकार ये सब वस्तुएँ अपने सजातीय पदार्थोंमें श्रेष्ठ हैं, उसी प्रकार पुराणोंमें श्रीनारदमहापुराण श्रेष्ठ कहा गया है। द्विजवरो ! आप सब लोगोंको शान्ति प्राप्त हो, आपका कल्याण हो। अब मैं अमित तेजस्वी व्यासजीके समीप जाऊँगा।ऐसा कहकर सूतजी शौनक आदि महात्माओंसे पूजित हो उन सबकी आज्ञा लेकर चले गये। वे शौनक आदि द्विज श्रेष्ठ महात्मा भी जो यज्ञानुष्ठानमें लगे हुए थे, एकाग्रचित्त हो सुने हुए समस्त धर्मोंके अनुष्ठानमें तत्पर हो, वहीं रहने लगे। जो कलिके पाप-विषका नाश करनेवाले श्रीहरिके जप और पूजन-विधिरूप औषधका सेवन करता है, वह निर्मल चित्तसे भगवान्के ध्यानमें लगकर सदा मनोवाञ्छित लोक प्राप्त करता है।
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॥ पूर्वभाग समाप्त ॥


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