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संक्षिप्त नारद पुराण

संक्षिप्त नारद पुराण

Sankshipt Narada Purana

by महर्षि वेदव्यास

Source: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (origin)

DevanagariHindipublished770 pages

Page 377 of 770

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Page 377
  • पूर्वभाग-द्वितीय पाद * ३७५

जन्मकालिक ग्रहोंकी स्थिति तथा जन्म-नक्षत्र-सम्बन्धी आठ प्रकारके कूटद्वारा वर-वधूकी कुण्डलीका मिलान किया जाता है। यदि जन्म-लग्न या जन्म-राशि (चन्द्रमा) से १, ४, ७, ८ या १२ वें स्थानमें मङ्गल या अन्य पापग्रह वरकी कुण्डलीमें हों तो पत्नीके लिये और कन्याकी कुण्डलीमें हों तो वरके लिये अनिष्टकारी होते हैं। यदि दोनोंकी कुण्डलियोंमें उक्त स्थानोंमें पापग्रहकी संख्या समान हो तो उक्त दोष नहीं माना जाता है। उदाहरणके लिये—

वरकी कुण्डली

+---------------+---------------+
|       ५       |       ३       |
| रा० ६         |               |
|       ४ चं० गु०       २ बु०   |
|                               |
|     श० ७      |     १ सू०     |
|                               |
|   ८           |         के० १२|
|       १० मं०  |           शु० |
|       ९       |      ११       |
+---------------+---------------+

पुनर्वसुके चतुर्थ चरणमें जन्म

कन्याकी कुण्डली

+---------------+---------------+
|     ५ चं०     |     ३ के०     |
| ६             |               |
|           ४           २ बु०   |
|                               |
|       ७       |     १ सू०     |
|                               |
|   ८           |             १२|
|       १० श० मं०           शु० |
|     ९ गु० रा  |      ११       |
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पूर्वाफाल्गुनीके प्रथम चरणमें जन्म

यहाँ वरकी कुण्डलीमें ४थे और ७वें स्थानमें शनि और मङ्गल दो पापग्रह हैं तथा कन्याकी कुण्डलीमें भी ७ वें स्थानमें शनि, मङ्गल हैं, जिससे दोनोंके परस्पर माङ्गलिक दोष नष्ट होनेके कारण इन दोनोंका वैवाहिक सम्बन्ध श्रेष्ठ सिद्ध होता है। यहाँ भकूटके गुण इस प्रकार हैं—

वरकन्यागुण
१ वर्ण—ब्राह्मणक्षत्रिय१
२ वश्य—जलचरवनचर१
३ तारा—५६१॥
४ योनि—मार्जारमूषक०
५ ग्रह (राशीश)—चन्द्रसूर्य५
६ गण—देवमनुष्य६
७ भकूट—२१२०
८ नाड़ी—१२८

$\overline{गुणोंका योग-२२॥}$

इस तरह नक्षत्रमेलापकमें भी गुणोंका योग २२॥ है। अठारहसे अधिक होनेके कारण इन दोनोंका विवाह-सम्बन्ध श्रेष्ठ सिद्ध होता है।

इसी प्रकार अन्य कुण्डलियोंसे भी ग्रह और नक्षत्रका मेल देखकर विवाहका निर्णय करना चाहिये।