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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 20

शुभाशुभप्रकरण ११
(निश्चयेन) काणसिद्धी, शुभः, अमृताख्यः, मुसलं, गदः च मातङ्गरक्षश्चरसुस्थिराख्य-
प्रवर्धमानाः क्रमेण (एते अष्टाविंशतियोगाः) स्वनाम्ना फलदाः (भवन्ति) ॥ २३-२४ ॥
आनन्द, कालदण्ड, धूम्र, धाता, सौम्य, ध्वांक्ष, केतु, श्रीवत्स, वज्र,
मुद्गर, छत्र, मित्र, मानस, पद्म, लुम्ब, उत्पात, मृत्यु, काण, सिद्धि, शुभ,
अमृत, मुसल, गद, मातंग, रक्ष, चर, सुस्थिर और प्रवर्द्धमानं, ये अट्ठाइस
योग अपने नाम के सदृश फल देनेवाले हैं ॥ २३-२४ ॥
इन योगों के जानने का उपाय
दास्रादर्कै मृगादिन्दौ सार्पाद्भौमे कराद्बुधे ।
मैत्राद्गुरौ भृगौ वैश्वाद्गण्या मन्दे च वारुणात् ॥ २५ ॥
अन्वयः—अर्कै दास्रात्, इन्दौ मृगात्, भौमे सार्पात्, बुधे करात्, गुरौ मैत्रात्,
भृगौ वैश्वात्, मन्दे वारुणात् (आनन्दादयो योगाः क्रमेण) गण्याः ॥ २५ ॥
रविवार को अश्विनी से, सोमवार को मृगशिरा से, मंगल को आश्लेषा
से, बुध को हस्त से, बृहस्पति को अनुराधा से, शुक्र को उत्तराषाढ़ से,
शनैश्चर को शतभिष से, अभिजित् के सहित इष्ट दिन नक्षत्र तक गणना
करने से जितनी संख्या हो आनन्दादि गणना से उतनी ही संख्यावाला योग
इष्ट दिन में जानना चाहिए । जैसे रविवार के दिन यदि श्रवण नक्षत्र हो तो
अश्विनी से अभिजित् सहित गिनने पर श्रवण तेइसवाँ हुआ और आनन्दादिकों
की गणना करने पर गदयोग तेइसवाँ हुआ । यही योग उस रविवार को
होगा । इसी रीति से और भी जानना चाहिए ॥ २५ ॥
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