मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)
Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary
दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंशुभाशुभप्रकरण ७
गोऽष्टौ चोभयपक्षगाश्च तिथयः शून्या बुधैः कीर्तिता
ऊर्जाषाढतपस्यशुक्रतपसां कृष्णे शराङ्गाब्धयः ॥ १०॥
शक्राः पञ्च सिते शक्राद्र्यग्निविश्वरसाः क्रमात् ॥
अन्वयः—भाद्रे चन्द्रदृशौ, नभसि अनलनेत्रे, माधवे द्वादशी, पौषे वेदशराः, इषे
दशशिवाः, मार्गे अद्रिनागाः, मधौ गोऽष्टौ, उभयपक्षगाः तिथयः बुधैः शून्याः कीर्तिताः ।
(तथा) ऊर्जाषाढतपस्यशुक्रतपसां कृष्णे क्रमात् शराङ्गाब्धयः शक्राः, पञ्च तथा सिते
(शुक्ले) शक्राद्र्यग्निविश्वरसाः (तिथयः) शून्याः कीर्तिताः ॥१०॥
भादों महीने में प्रतिपदा और दुइज, श्रावण में दुइज और तीज, वैशाख
में द्वादशी, पौष में चौथि और पञ्चमी, कुआर में दशमी और एकादशी,
अगहन में सप्तमी और अष्टमी, चैत्र में अष्टमी और नवमी ये शुक्ल-कृष्ण
दोनों पक्षों की तिथियाँ पण्डितों ने शून्य कही हैं। कार्त्तिक, आषाढ़,
फाल्गुन, ज्येष्ठ, माघ, इन महीनों में कृष्णपक्ष की पञ्चमी, छठि, चौथि,
चतुर्दशी, पञ्चमी अर्थात् कात्तिककृष्ण पञ्चमी, आषाढ़कृष्ण छठि, फाल्गुन-
कृष्ण चौथि, ज्येष्ठकृष्ण चतुर्दशी, माघकृष्ण पञ्चमी भी शून्य हैं और
इन्हीं महीनों के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी, सप्तमी, तीज, त्रयोदशी और छठि
ये तिथियाँ क्रम से शून्य हैं ॥ १० ॥
शून्यतिथिचक्र
| भादों | श्रावण | वैशाख | पौष | कुआर | अगहन | चैत | कार्त्तिक | आषाढ़ | फाल्गुन | ज्येष्ठ | माघ | मास |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १ | २ | ४ | १० | ७ | ८ | |||||||
| १२ | ५ | ६ | ४ | १४ | ५ | कृष्ण | ||||||
| २ | ३ | ५ | ११ | ८ | ९ | तिथि | ||||||
| १ | २ | ४ | १० | ७ | ८ | |||||||
| १२ | १४ | ७ | ३ | १३ | ६ | शुक्ल | ||||||
| २ | ३ | ५ | ११ | ८ | ९ | तिथि |
निन्द्य तिथि और निन्द्य नक्षत्र
तथा निन्द्यं शुभे सार्पं द्वादश्यां वैश्वमादिमे ॥ ११॥
अनुराधा द्वितीयायां पञ्चम्यां पितृभं तथा ।
त्र्युत्तराश्च तृतीयायामेकादश्यां च रोहिणी ॥ १२॥
स्वातीचित्रे त्रयोदश्यां सप्तम्यां हस्तराक्षसे ।
नवम्यां कृत्तिकाऽष्टम्यां पूभा षष्ठ्यां च रोहिणी ॥ १३ ॥