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सर्वकोश
मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

मुहूर्त चिन्तामणि (दैवज्ञ राम - षोडश संस्कार, यात्रा, वास्तु व गृह-प्रवेश मुहूर्त सटीक)

Muhurta Chintamani of Daivajna Rama with Commentary

दैवज्ञ राम (टीकाकार: पं. केदारदत्त जोशी) द्वारा

DevanagariHindipublished207 पृष्ठ

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पृष्ठ 15

६ मुहूर्तचिन्तामणि
अन्वयः—सूर्यादिवारे (क्रमेण) सूर्येशपञ्चाग्निरसाष्टनन्दाः, वेदाङ्गसप्ताश्वि-
गजाङ्कशैलाः, सूर्याङ्गसप्तोरगगोदिगीशाः तिथयः (क्रमात्) दग्धाः, विषाख्याः, हुताशनाः
भवन्ति च (तथा) अर्कात् (क्रमेण) मघाविशाखाशिवमूलवह्निः ब्राह्मांकरः यमघण्टकाः
भवन्ति । (इमे) शुभे विवर्ज्याः गमने तु अवश्यं (विवर्ज्याः) ।। ८-६ ।।
रविवार को द्वादशी, सोमवार को एकादशी, मंगल को पञ्चमी, बुधवार
को तीज, बृहस्पति को छठि, शुक्रवार को अष्टमी, शनैश्चर को नवमी
हो तो दग्धयोग होता है तथा रविवार को चौथि, सोमवार को छठि,
मंगल को सप्तमी, 'बुधवार को दुइज, बृहस्पति को अष्टमी, शुक्रवार को
नवमी, शनैश्चर को सप्तमी हो तो विषाख्ययोग होता है और रविवार को
द्वादशी, सोमवार को छठि, मंगल को सप्तमी, बुधवार को अष्टमी, बृहस्पति
को नवमी, शुक्रवार को दशमी और शनैश्चर को एकादशी हो तो हुताशन-
योग होता है ।। ८ ।।
सूर्यादि वारों में मघा, विशाखा, आर्द्रा, मूल, कृत्तिका, रोहिणी और
हस्त ये नक्षत्र हों, अर्थात् रविवार को मघा, सोमवार को विशाखा, मंगल
को आर्द्रा, बुधवार को मूल, बृहस्पति को कृत्तिका, शुक्रवार को रोहिणी
और शनैश्चर को हस्त हो तो यमघण्टयोग होता है । यह योग शुभ कार्यों
में वर्जनीय है । परन्तु यात्रा में तो अवश्य ही वर्जित है ।। ९ ।।
दग्ध, विषाख्य हुताशन चक्र
| रवि | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर | वार |
| १२ | ११ | ५ | ३ | ६ | ८ | ९ | दग्ध |
| ४ | ६ | ७ | २ | ८ | ९ | ७ | विषाख्य |
| १२ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | हुताशन |
यमघण्टचक्र
| रवि | सोम | मंगल | बुध | बृहस्पति | शुक्र | शनैश्चर |
| मघा | विशाखा | आर्द्रा | मूल | कृत्तिका | रोहिणी | हस्त |
शून्य तिथियाँ
भाद्रे चन्द्रदृशौ नभस्यनलनेत्रे माधवे द्वादशी
पौषे वेदशरा इषे दशशिवा मार्गेऽद्रिनागा मधौ ।