मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
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Read in contextचतुर्थ अंक
स्थान—मन्त्री राक्षस के घर के बाहर का प्रान्त।
(करभक घबड़ाया हुआ आता है)
करभक ।— अहाहा हा ! अहाहा हा !
अतिशय दुरगम ठाम मै, सत जोजन सौं दूर। ५
कौन जात है धाइ बिनु, प्रभु निदेस भरपूर॥
अब राक्षस मन्त्री के घर चलूं (थका सा घूम कर)
अरे कोई चौकीदार है? स्वामी राक्षस मन्त्री से जाकर कहो कि 'करभक काम पूरा कर के पटने से दौड़ा आता है'। १०
(दौवारिक आता है)
दौवारिक ।— अजी ! चिल्लाओ मत, स्वामी राक्षस मन्त्री को राजकाज सोचने २ सिर मे ऐसी बिथा हो गई है कि अब तक सोने के बिछोने से नहीं उठे, इस से एक घड़ी भर ठहरो, अवसर मिलता है तो मै निवेदन किये देता हूं। १५
(परदा उठता है और सोने के बिछौने पर चिन्ता में भरा राक्षस और शकटदास दिखाई पड़ते हैं)
राक्षस ।— (आप ही आप) -
कारज उलटो होत है, कुटिल नीति के जोर।
का कीजै सोचत यही, जागि होय है भोर॥ २०
और भी।
आरम्भ पहिले साचि रचना चेरा की करि लावहीं।
इक बात मै गर्भित बहुत फल गूढ़ भेद दिखावहीं॥
कारन अकारन सोचि फैली क्रियन कों सकुचावहीं।
जे करहि नाटक बहुत दुख हम सरिस तेऊ पावहीं॥ २५