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मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)

Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi

by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)

Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)

DevanagariHindipublished173 pages

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२८ मुद्राराक्षस ।

नटी।—चन्द्रग्रहण लगने वाला है।
सूत्र०।—कौन कहता है ?
नटी।—नगर के लोगों के मुंह सुना है।
सूत्र०।—प्यारी ! मैंने ज्योति शास्त्र के चौसठों * अंगों मे बडा
५ परिश्रम किया है। जो हो, रसोई तो होने दो + पर आज
तो गहन है यह तो किसी ने तुझे धोखाही दिया है क्योकि—
चन्द्र×विम्ब पूरन भए क्रूरकेतु - हठ दाप ।


* होरा मुहूर्त जातक ताजिक रमल इत्यादि।
+ अर्थात् ग्रहण का योग तो कदापि नही है। खैर रसोई हो।
×केतु अर्थात राक्षस मंत्री। राक्षस मंत्री ब्राह्मण था और केवल नाम उस का राक्षस था कि तु गुण उस में देवताओ के थे।
केतु ग्रह का और हाल पुस्तक के अन्त में लिखा है।
— इस श्लोक का यथार्थ तात्पर्य जानने को काशी संस्कृत विद्यालय के प्रधान जगद्विख्यात पण्डितवर बापूदेव शास्त्री को मैने पत्र लिखा। क्योंकि टीकाकारो ने “चन्द्रमा पूर्ण होने पर” यही अर्थ किया हे और इस अर्थ से मेरा जी नहीं भरा। कारण यह कि पूर्ण चन्द्र में तो ग्रहण लगता ही है, इस में विशेष क्या हुआ ? शास्त्री जी ने जो उत्तर दिया है वह यहां प्रकाशित होता है।
श्रीयुत बाबू साहिब को बापूदेव का कोटिश आशीर्वाद, आपने प्रश्न लिख भेजे उन का संक्षेप से उत्तर लिखता हूं।
१ सूर्य्य के अस्त हो जाने पर जो रात्रि में अन्धकार होता हे यही पृथ्वी की छाया है और पृथ्वी गोलाकार है और सूर्य्य से छोटी है इस लिये उसकी छाया गव्य्वाकार शंकु के आकार की होती है और यह आकाश में चन्द्र के भ्रमणमार्ग को पार कर बहुत दूरतक सातवें से आठवें राशि के अन्तर पर रहती २ और पूर्णिमा के अन्त में चन्द्रमा भी सूर्य्य से छ राशि के अन्तर पर रहता है। इस लिए जिस पूर्णिमा में चन्द्रमा पृथ्वी की छाया में आ जाता है अर्थात् पृथिवी की छाया चन्द्रमा के बिम्ब पर पड़ती है तभी वह चंद्र का ग्रहण कहलाता है और छाया जो चन्द्रबिम्ब पर देख पड़ती है वही ग्रास कहलाता है। और राहु नामक एक दैत्य प्रसिद्ध है वह चन्द्रग्रहणकाल में पृथ्वी की छाया में प्रवेश कर के चन्द्र की ओर प्रभा का पीछा करता है, इस कारण