मुद्राराक्षसम् (विशाखदत्त - भारतेन्दु हरिश्चन्द्र हिन्दी अनुवाद)
Mudrarakshasam of Vishakhadatta Hindi
by विशाखदत्त (अनुवादक: भारतेन्दु हरिश्चन्द्र)
Source: Mudrarakshas Drama translated into Hindi by Bharatendu Harishchandra (1925) (origin)
Public domain in India · Report a copyright issue
Page 112 of 173
Read in contextपंचम अङ्क । ११५
वा जो लोग चन्द्रगुप्त से उदास हो गए हैं वही लोग इधर मिले हैं, मैं व्यर्थ सोच करता हूं । (प्रगट) प्रियम्वदक ! कुमार के अनुयायी राजा लोगों से हमारी ओर से कह दो कि अब कुसुमपुर दिन दिन पास आता जाता है, इस से सब लोग अपना सेना अलग अलग कर के जो जहां नियुक्त हों ५
वहां सावधानी से रहें ।
आगे खस अरु मगध चलैं जय ध्वजहि उड़ाए ।
यवन और गंधार रहैं मधि सैन जमाए ॥
चेदि हून सक राज लोग पीछे सो धावहि ।
कौलूतादिक नृपति कुमारहि घेरे आवहि * ॥ १०
जैसे न्यायशास्त्र में वाद करनेवाला पूर्वोक्त साधनादिको को न जान कर स्वपक्ष स्थापन में असमर्थ हो कर हार जाता है, वैसे ही जो राजा ( भावक ) सैना आदि साधन से अन्वित है और अपने पक्ष को जानता है, विपक्ष से बचता है वह जय पाता है । जो आप साध्यो ( सेना नीति आदिको ) से हीन ( असिद्ध ) है और जिसको शत्रु मित्र का ज्ञान नहीं है और जो अपने पक्ष को नहीं समझता और अनुचित साधनों का [ अर्थात् शत्रु से मिले हुए लोगों का ] अंगीकार करता है, वह हारता है । यह राक्षस ने इसी विचार पर कहा कि चन्द्रगुप्त के लोग इधर बहुत मिले हैं इस से हारने का सन्देह है [ दर्शनों का थोड़ा सा बखान पाठकगण को जानकारी के हेतु पीछे किया जायगा ] ।
* खस हिमालय के उत्तर की एक जाति । कोई विद्वान तिब्बत, कोई लद्दाख़ को खस देश मानते हैं । यवन शब्द से मुख्य तात्पर्य्य यूनानप्रान्त के देशों से है (Bactria, Ionia, Greek) परन्तु पश्चिम की विदेशी और अन्यधर्मी जाति मात्र को मुहाविरे में यवन कहते हैं । गांधार जिस का अपभ्रंश कन्दहार है । चेदि देश बुन्देलखराड, कोई कोई चन्देरी के छोटे शहर को चेदि देश की राजधानी कहते हैं । हून देश योरोप के तत्काल के किसी असभ्य देश का नाम ( Huns Hungary ) कोई विद्वान् मध्यएशिया में हून देश मानते हैं । शक को कोई विद्वान् तातार देश कहते हैं और कोई ( Scythians ) को शक कहते हैं । कोई बलूचिस्तान के पास के देशों को शक देश मानते हैं । कौलूत देश के राजा चित्रवर्मादिक राक्षस के बड़े विश्वस्त थे इसी से कुमार की सुरक्षा इनको दी थी । इन को राजाओं के