Skip to content
SarvaKosh
मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

मुद्राराक्षसम् (सटीक संस्कृत नाटक)

Mudrarakshasam Natakam with Hindi Commentary

by महाकवि विशाखदत्त

DevanagariSanskritpublished488 pages

Page 212 of 488

Read in context
Page 212

द्वितीयोऽङ्कः ११७

ईषत्कम्पनं, सूचयित्वा—अभिनयं कृत्वा । कथं—कुतः, प्रथमम् एव—पूर्वमेव, सर्प-दर्शनम्—सर्पस्य अहेः दर्शनम् अवलोकनम् । नः—अस्माकं, सर्पदर्शने—भुजङ्गमाव-लोकने, कुतूहलम्—कौतुकं, नास्ति—न विद्यते । तत्—तस्मात्, एनम्—आहि-तुण्डिकम्, परितोष्य—सन्तुष्टं कृत्वा, विसर्जंय—इतो गन्तुं प्रेरय । अमात्यः—राक्षसः, अदर्शनेन—अवलोकन मन्तरैव, प्रसादम्—अनुग्रहम् उपहारमिति यावत्, करोति—विदधाति ददाति इति यावत्, न पुनः दर्शनेन—सर्पक्रीडामवलोक्ये-त्यर्थः । भद्र—कल्याणयुक्त !, मम वचनेन—मत्कथनेन, अमात्यं, विज्ञापय—निवेदय, अहं, केवलं, सर्पोपजीवी—अहिखेलनवृत्तिः, न—नहि, (किन्तु) अहं, प्राकृतकविः—प्राकृतभाषाकाव्यरचयिता (अस्मि), तस्मात्—तत्, यदि, मे—मम, दर्शनेन—सर्पक्रीडावलोकनेन, अमात्यः, प्रसादं न करोति, तदा—तर्हि, एतत्, पत्रकमपि, वाचयितुं—पठितुं, प्रसीदतु—प्रसन्नो भवतु । पत्रम्—आहि-तुण्डिकदत्तं दलं, गृहीत्वा—आदाय, ˙राक्षसम्, उपसृत्य, उपेत्य आहेति शेषः । आहितुण्डिकः—व्यालग्राही, विज्ञापयति—निवेदयति— न केवलमहं……।

हिन्दी अनुवाद—राक्षस— [ बाई आँख का फड़कना सूचित करके मन में] कैसे पहले ही सांप का दर्शन हुआ [ प्रकट ] प्रियंवदक ! हमे साँप ( के खेल ) देखने की उत्कंठा नही है । इसलिए इसे सन्तुष्ट करके विदा कर दो ।

प्रियंवदक—जो आर्य की आज्ञा । [ घूमकर और सँपेरे के पास जाकर ] भद्र! ये मंत्री जी बिना ( सर्प-क्रीडा ) दिखाये तुम पर प्रसन्न है, दिखाने से नही ।

सँपेरा—भद्र ! मेरी ओर से मंत्री जी से निवेदन कर दो कि मै केवल सँपेरा (ही) नही हूँ, प्राकृत भाषा का कवि भी हूँ । इसलिए यदि मंत्री जी मुझे दर्शन से कृतार्थ नही करते है तो ( कम से कम ) यह पत्र पढ़ने की कृपा करे ।

प्रियंवदक—[ पत्र लेकर राक्षस के पास पहुँचकर ] अमात्य । यह सँपेरा निवेदन कर रहा है कि मै केवल सर्पजीवी ( सँपेरा ) नही हूँ, प्राकृत का कवि भी हूँ । इसलिये यदि अमात्य मुझे दर्शन देने की कृपा नहीं करते है तो यह पत्र ही बाँच कर अनुगृहीत करें ।

**टिप्पणी—वामाक्षिस्पन्दनम्—**बाई आँख का फड़कना । यह पुरुषों के लिये अशुभसूचक है, जब कि दाईं आँख का फड़कना शुभसूचक है । इसके विपरीत स्त्रियों के लिये बाईं आँख का फड़कना शुभ होता है और दाई का अशुभ ।