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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 359

संतमत-प्रभाव द्योतक पद ३११
७
आज्यो आज्यो गोविन्द म्हॉरे म्हैल, निहारॉ थॉरी वाटडली खंडीजी।
म्हॉरे आज्यो।
तन का त्यागू कपडा जीँ, अग ते परभात,
खडी जोवती राह मे जी, सतगरु पोछे दाता आय।
पियालो लियाँ हाजर खडी जी पन।
साधु हमारी आतमा जी, हम साधन की देह,
रोम शोम मे रम रही जी, ज्यूँ बादल मे मेह।
सुरत हरि नाम से लगी जी।
मीराँ हरि लाडली जी, तुम मीराँ के स्याम,
मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, दरसण द्यो गोविन्दा आय।
सुरत निज नाम से लगी जी ॥५६२॥†
८
आवो आवो जी रग भीना, म्हॉरे म्हैल, प्याला तो लियाँ हाजर खडी
सत जुग मे सूती रही, त्रेता लई जगाय।
द्वापर मे समझी नही, कलजुग पोहँच्यो आय।
सत्तगरु शब्द उचारिया जी, बिनती करो सुनाय।
मीराँ नै गिरधर मिल्याँ जी, निरभै मगल गाय ॥५६३॥ †
उपर्युक्त दोनो पदो मे अर्थ-सगति नही है।
९
राणा जी गिरधर रा गुण गास्याँ।
गुर परताप साध की संगति, सहजै ही तिर जास्याँ।
म्हॉरे तो पण चरणामृत को, निति उठि देवल जास्याँ।
कथा करितण सुख निसि बासर, महाप्रसाद ले धास्याँ।
सुनि सुनि बचन साधरा, मुषरा निरत कराँ और नाचाँ।