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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 358

३१० मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
मरण रो साथी··रोय रोय अखियाँ. राती,~" से वियोग, “यो
ससार · दे समझाती” से निर्वेद और अन्तिम दो पक्तियो से मिलन-
जनित आनन्द ही व्यक्त होता है ।
६
मिलता जाज्यो हो गुरु ज्ञानी, थॉरी सूरत देखि लुभानी ।
मेरो नाम बूझि तुम लीज्यो, मै हूँ बिरह दिवानी ।
रात दिवस कल नाहि परत है, जैसे मीन बिन पानी ।
दरस बिना मोहि कछु ना सुहावै, तलफ तलफ मर जानी ।
मीराँ तो चरणन की चेरी, सुण लीजै सुख दानी ॥५६१॥
प्रथम पक्ति मे 'हो गुरु ग्यानी' के बदले कही कही 'हो जी
गुमानी' पाठ भी मिलता है। चन्द्रसखी के नाम पर प्रचलित निम्ना-
कित पद की और इस उपर्युक्त पद की प्रथम पक्तियो मे भाव और
भाषा का गहरा साम्य है, यद्यपि शेष पदाभिव्यक्ति सर्वथा भिन्न पडती है।
मिलता जाज्यो राज गुमानी, थॉरी सूरत देख लुभानी ।
म्हाँरो नाम थे जाणो बूझो, मै हूँ राम दिवानी ।
आमी सामी¹ पोल² नन्द की, चन्दन चोक निसानी ।
थे म्हॉरे घर आवो बसी वाला, करस्याँ बहुत लडानी³ ।
करु रसोई सोध⁴ की जी, भोत करुँ मिजमानी ।
थे आवो हरि धेन चरावण, मै जल जाना पाणी ।
थे नन्द जी का लाल कॅहावो, मै गोपी मस्तानी ।
ज़मना जी के नीराँ तीराँ, थे हरि धेन चराज्यो ।
चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छबि, नित बरसाणे आज्यो ।
चन्द्रसखी के नाम पर प्रचलित इस पद मे पुनरुक्ति और अर्थ-
असम्बद्धता दोनों ही दोष हैं, जो मीराँ के नाम पर प्रचलित पद मे नही
है। अत. बहुत सम्भव प्रतीत होता है कि मीराँ का पद ही गेय परम्परा
फलस्वरूप चन्द्रसखी के नाम पर चल पडा हो ।
१ आमने सामने, २ सदर दरवाजा, ३ खातिरदारी, ४ शुद्धता ।