मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextनाथ-प्रभाव द्योतक पद ३०५
साड़ी फाड़ी ने कफनी कीधी, वाला, अंग पर विभूति लगाडी ।
आसण बाली बालो मढ़ी माँ बैठो, वाला घेर घेर¹ अलख जगाड़ी !
मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, प्रेम नी कटारी मुने मारी ॥५५४॥
उपर्युक्त की पद प्रथम पंक्ति में 'मलवो' और 'मल्यो' दोनो ही शब्दों
का प्रयोग हुआ है। अर्थ संगति के दृष्टिकोण से यह अशुद्ध है। सम्पूर्ण
पदाभिव्यक्ति के देखते 'मलवो के बदले 'मल्यो' प्रयोग ही शुद्ध प्रतीत
होता है।
“घेर घेर अलख जगाडी” जैसी भावना नाथ-प्रभाव द्योतक
अधिकांश पदो की विशेषता है।
३
उठ तो चाले अवधूत, मरी माँ कोई ना बिराजे, उठ चले अवधूत ।
पथी हतो² ते पथे लाग्यो, आसन पड़ रही विभूत ।
चेलो साथी कोई ना सूधर्यो, सब ही नीबड़या³ कपूत ।
बाई मीराँ के प्रभु गिरधर नागर, टूट तो गए घर सूत ॥५५५।
यह पद अपनी तरह का एक ही है। पदाभिव्यक्ति विशेष
विचारणीय है।
• १ घर, २ था, ३ निकले ।
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