मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context३०४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
ऐसी सूरत या जग माहि, फेरि न देखी सोई।
मीराँ के प्रभु कब रे मिलोगे, मिलिया आणन्द होई ॥५५१॥
५
जोगी मत जा, मत जा, पाँव परूँ मै तेरी।
प्रेम भक्ति को पैडो ही न्यारो, हम कूँ गैल बता जा।
अगर चन्दन की चिता रचाऊँ, अपने हाथ जला जा।
जल बल भई भस्म की ढेरी, अपने अग लगा जा।
मीराँ कहै प्रभुगिरिधर नागर, जोत मे जोत मिला जा ॥५५२॥
उपर्युक्त सभी पदो मे प्रयुक्त क्रिया पदो पर आधुनिक प्रभाव विशेष विचारणीय है।
गुजराती में प्राप्त पद
१
मै ने सारा जगल ढूँढा रे, जोगिडा ना पाया।
काना बिच कुण्डल, जोगी गले बिच सेली, घर घर अलख जगाये रे।
अगर चन्दन की धुनी, जोगी, धकाई, अंग बीच भभूत लगाये रे।
बाई मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, सबद का ध्यान लगाये रे।
॥५५३॥†
उपर्युक्त पद गुजराती पद सग्रहो मे ही प्राप्त है, यद्यपि पद की भाषा पर गुजराती का कोई विशेष प्रभाव नही प्रतीत होता।
इस पद से व्यक्त होनेवाली भावनाये नाथ-प्रभाव द्योतक प्रायः अन्य पदो मे भी मिल जाती हैं।
२
मलवो¹ जटाधारी जोगेश्वर बाबा, मल्यो² रे जयधारी।
हाथ माँ झारी हूं तो बाल कुँवारी, वाला, देवल³ पूजवाने चाली।
१ मिलो, २ मिल गया, ३ मन्दिर।