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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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२९६ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
कॉई करूँ, कित जाऊँ सजनी, नैण गुमायो रोय।
आरति तेरे अन्तरि मेरे, आवो अपनी जाणि।
मीराँ व्याकुल विरहणी रे, तुम बिन तलफत प्राण ॥५३५॥
४
पिय बिन सूनो छै जी म्हाँरो देस।
ऐसा है कोई पिव कूँ मिलावै, तन मन करूँ सब पेस।
तेरे कारण बन बन डोलूँ, कर जोगण को भेस।
अवधि बदीति अजहूँ न आये, पडर होइ गया केस।
मीराँ के प्रभु कबर मिलोगे, तजि दियो नगर नरेस ॥५३६॥
५
जोगिया जी आवो थे या देस।
नैणन देखूँ नाथ मेरो, ध्याय¹ करूँ आदेस।
आया सावण मास सजनी, भरे जल थल ताल।
रावल कुण बिलमाइ² राख्यो, बिरहिन है बेहाल।
बिछडियाँ कोई भौं³ भयो रे, जोगी, ए दिन अहला४ जाइ।
एक बेर देह फेरि, नगर हमारे आइ।
वा सूरति मेरे मन बसे रे, जोगी छिन भर रह्यो न जाइ।
मीराँ के प्रभु हरि अविनासी, दरसण द्यो हरि आइ ॥५३७॥
पाठान्तर १,
जोगिया जी आजो इण देस।
मै जास्या देखूँ नाथ नैं, धाइ करूँ आदेस।
आया सावण भादवा, भरिया जल थल ताल।
साँई कूँ बिलमाई राख्यो, ब्रहनी है बैहाल।
१ दौडकर, २ फुसला रखना, ३ युग, ४ व्यर्थ।