मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextनाथ-प्रभाव् द्योतक पद
राजस्थानी में प्राप्त पद
१
जावा दे जावा दे, जोगी किस का मीत।
सदा उदासी रहै मोरी सजनी, निपट अटपटी रीत।
बोलत बचन मधुर से मानूँ, जोरत नाहि प्रीत।
मैं जाणूँ या पार निभेगी, छोड़ि चले अधबीच।
मीराँ के प्रभु स्याम मनोहर, प्रेम पियारा मीत ॥५३३॥
२
जोगिया जी छाइ रह्यो परदेस।
जब का बिछुडिया फेर न मिलिया, बहोरि दियो न सदेस।
या तन ऊपरि भसम रमाऊँ, खोर करूँ सिर केस।
भगवाँ भेख धरूँ तुम कारण, ढूँढत च्यारूँ देस।
मीराँ के प्रभु राम मिलण कूँ, जीवनि जनम अनेस ॥५३४॥
३
जोगिया जी ' निसि दिन जोहाँ थॉरी बाट।
पॉव न चालै, पथ दुहेलो, आडा ओघड घाट।
नगर आई जोगी रम गया रे, मो मन प्रीत न पाइ।
मैं भोली भोलापन किन्हो, राख्यो नही बिलमाइ।
जोगिया कूँ जोवत बहूँ दिन बीता, अजहूँ आयो नाहि।
बिरह बुझावण अन्तरि आवो, तपत लगी तन मॉहि।
कै तो जोगी जग मे नाही, कैर बिसारी मोय।