मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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४
एक दिन मोरली बजाई, कन्हैया एक दिन मोरली बजाई।
मोरली नाना दे मेरो मन हरि लीनो, ओम की सुरता उठाई।
गौओ तो सब घास ना खाये, ............।
शर्वरी तो बली स्तभ भई हे, चन्द्र गयो छुपाई रे।
मेघ घटा घट थई रही छे, बादरी कारी गै वाही रे।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल चित छाई रे।
॥५२८॥†
५
लीधाँ रे भटके, म्हाँरा मन लीधाँ रे लटके।
गात्र रग कीधाँ गिरिधारिए, जो मार्या झटके।
मन रे मारू मोरली मे मोह्युँ, पेला बाँस तणे कटके।
मीराँ के प्रभु गिरिधर ना गुण, हो रग लाग्य अटके ॥५२९॥†
६
मोरलीए मोह्याँ मोहन, तारी मोरलीए मन मोह्याँ।
थारे कारण शामलिया वाहला, गण भुवन मेणे जोया रे।
थारा सरीखा प्रभु नव कोई दीठा, गण भुवन मनडे न मोह्याँ रे।
मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित्र प्रोयाँ रे ॥५३०॥†
७
मार्या छे मोहन बाण, वा'ली डे मार्या छे मोहना बाण।
तमारी मोरलीए माराँ मनड़ाँ बिधायाँ, बिधायाँ, तन मन प्राण।
वृन्दावन ने मारग जाताँ, हाँ रे मारो पालवडो मो ताण।
जल जमना जल भरवा गयाँ ताँ, काँठले उभो पेलो काण।
मीराँ बाई के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल चित्त आण ॥५३१॥†