मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextवैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २९१
भाषा मे अर्थ-सगति नही है। उपर्युक्त पद मीराँ-विरचित है
ऐसा भी कोई आभास पदाभिव्यक्ति से नही मिलता।
पद स० ३, १४ और १५ इन तीनो ही पद मे राग कल्याण की
व्युत्पत्ति का वर्णन या प्रशसा है।* पद स० ३ की भाषा पजाबी से
प्रभावित है। पद स० २४ की भाषा शुद्ध ब्रजभाषा है और पद स०
१५ की भाषा गुजराती से प्रभावित है। उपर्युक्त परिस्थिति मे ऐसे
पदो को प्रक्षिप्त मानना ही युक्तियुक्त प्रतीत होता है।
गुजराती में प्राप्त पद
१
वागे छे रे, वागे छे रे, पेला वनडा माँ, मीठी वेणु वागे छे दुरनो
डर लागे छे।
सासु सती माती सुख निद्रा माँ, जाऊँ तोरे ननदल जागे छे।
ससुरो हमरो परम सुहागी, दियेरी वो छन छेनो दिल माँ दाझे छे।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, जनम मरण भे भागे छे ।।५२५।।†
२
अरे मोरली नन्दावन रागी, बागी छे जमनाने तीरे रे।
मोरली ने नादे घेलाँ कीधाँ, मन काँई काँई कामण कीधाँ रे।
जमनाने नीर तीर धेनु चरावे, काँधे काली काँबली रे।
मोर मुगट पिताम्बर शोभे, मधुरी सी मोरली बजावे रे।
मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरणकमल बलिहारी रे ।।५२६।।†
३
चालो नी जोवा जइये रे, माँ मोरली वागी।
भर निद्रा माँ हुँरे सुती ती, जब कि ने जोवा जागी॥
वृन्दावन ने मारग जाता, सामो मलियो सुहागी।
मीराँ के प्रभु गिरधर ना गुण, चरण कमल लेहे लागी ।।५२७।।†