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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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Page 328

वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २७७
मिश्रित भाषाओं में प्राप्त पद
१
आवत मोरी गलियन मे गिरधारी, मै तो छुप गई लाज की मारी।
कुसुमल पाग केसऱ्या जामा, ऊपर फूल हजारी।
मुकुट ऊपरै छत्र विराजे, कुडल की छवि न्यारी¹।
केसरी चीर दरियाई को लेगी, ऊपर अगिया भारी।
आवते देखे किसन मुरारी, छुप गई राधा प्यारी।
मोर मुकुट मनोहर सोहै, नथनी की छवि न्यारी।
गल मोतियन की माल विराजे, चरण कमल बलिहारी।
ऊभी² राधा प्यारी अरज करत है, सुर्ण जे किसन मुरारी।
मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, चरण कमल पर बारी ॥४९९॥†
पद को तीन अंशो मे बाँटा जा सकता है। प्रथमांश "आवत
मोरी अगिया भारी" मे अपनी व्यक्तिगत भावो की
अभिव्यक्ति है। "आवते देखे ∙∙ ∙किसन मुरारी" लगभग प्रथम
पंक्ति की ही पुनरुक्ति है। परन्तु जहाँ प्रथम पंक्ति मे अपनी भावनाओ
का ही वर्णन हुआ है, वहाँ द्वितीयांश मे उन्ही भावों का राधा मे आरोप
किया गया है। तृतीयांश "ऊभी राधा पर बारी" का शेष पद
से समन्वय ही नही होता। ऐसे संगति-हीन पदों की प्रामाणिकता
विशेष संदिग्ध है।
२
थाने कुब्जा ही मनमानी, हम सो न बोलना हो राज।
हमरी कहा सुनी विष लागे, वाहा जाय प्रेम रस पागे।
उन संग हिलमिल रहना, हँसना बोलना हो राज।
हम सो कहे सिगार उतारो, दृग अंजन सब ही धोयँ डारो।
१ अपूर्व, २ खडी हुई।