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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

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वैष्णव-प्रभाव द्योतक पद २७३
रुकमणी ने मदिर जैने रंगे रमोरे लोल,
हवे तमारे अमसाथे शुं काम जो।
अलगा रहो अलबेला मने अडशे नही रे लोल,
तम साथे न॑हि बोलूं नदकुमार जो।
भले ने पधारो मोनती तणे रे लोल,
आज पछी आवशोमा मारे द्वार जो।
नारदे कहचूं सतभामा साभलो रे लोल,
ऐ निर्लज ने नथीं तमारू काम जो।
काला ने वा'ला करतो ते आवशेरे लोल,
मोटा कुलनी मूक शोभा मान जो।
उतरचा आभरणारे सर्वे अग थकी रे लोल,
लो शामलिया तमारो शणगार जो।
मारा रे मैयरनी ओढूं आढणी रे लोल,
बीजूं आयो माने ती दरबार जो।
चरणा चीर उतारी चोली चूंदरी रे लोल,
उरथ की उतारचो नवसर हार जो।
काबी ने कडला रे भोटी दामणी रे लोल,
सर्व संभाली लेजो नन्दकुमार जो।
आगलथी नव जाण्यूँ मे तो रावडूं रे लोल,
घरथी न जाण्यूँ धूतारानो ढग जो।
वाला पणरी प्रीत अमारी पालटी रे लोल,
ए निर्लेंज ने शानो दीजे रग जो।
धीरज नी बातो धरथी जाणी नही रे लोल;
प्रीत करीने परवश कीधा प्राण जो।
कालजणा कोरी ने भीतर भेदिया रे लोल,
मीट उलियाँ मार्या मोहना वाण जी।
प्रीत करी पर हरऊँ नोतू पधारू रे लोल,
थोडा दिवस माँ शूं दीधा मने सुख जो।
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