मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context३७२ मीरॉँ-वृहद्-पद-संग्रह
मारे ऑँगनए द्राख बिजॊरा, मेवले भराउँ तारा खोला१ ।
प्रीत करे ने तेनी पुठ न मेले, पासे थी से नथी खसता२ ।
मीराँ बाई के प्रभु गिरिधर ना गुण, हाँ रे वालो हृदय कमलमॉँ बसता ।
।।४९३।।†
३८
दव३ तो लागेल डुँगर४ मे, कहो ने ओधा जी हवे केम करी ओ ।
केम ते करी ओ, अमे केम करी ओ, दव तो लागेल डुगर मे ।
छालवा५ जइये तो वाहला हाली न शकीए, वेशी रहीए तो अमे
बली मरीए रे।
आरे वरतीए नथी ठेकाणँरू रे, वाहला हेरी परवरती नी पाँखे
अमे फरीए रे।
ससार सागर महाजण भरीओ वाहला हेरी, बॉँहेड़ी झालो नीकर
बूडी मरीए रे।
बाईँ मीराँ के प्रभु गिरधर नागर हेरी, गुरु जी तारे तो अमे
अमे तरीए रे। ।।४९४।।†
३९
जाण्यूँ जाण्यूँ हेत तमारू जदवारे लोल, हेतज होय तो हुई डामा बरताय जो,
अमे तमारी आँख डिये अलखामणा६ रे लोल, बालप होय तो नयणा
मॉँ कलकाय जो ।
पारिजातक नूँ फूल रे नारद लखियारे लोल;
जै सोप्यूँ राणी रुकमणी ने दरबार जो ।
राके पाखडकी मारे मदिर नव मोकली रे लोल;
कीधी मुज थीरा अदकेरी नार जो।
अचरत पाम्या ने आनन्द उतर्यो रे लोल,
जाओ जाओ जाओ नहि बोलूँ सुन्दर श्याम जो।
१ गोद, २ हटना, ३ अग्नि, ४ जगल, ५ दौडना, ६ परिचय।