मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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गुजराती में प्राप्त पद
१
बोल माँ बोल माँ बोल माँ रे।
राधा कृष्ण बिना बीजूँ बोल माँ¹।
साकर शेलडीनो स्वाद तजी ने।
कडवो लीवडो घोल माँ रे।
चाँदा सूरजनु तेझ तजी ने।
अगिया सगा ने प्रीत जोड माँ रे।
हीरा माणेक झवेर तजी ने,
कथीर सगाते मणि तोल माँ रे।
मीराँ कहे प्रभु गिरधर नागर,
शरीर आप्यु सम तोल माँ रे ॥३७०॥
२
ध्यान धणी केरू धरवूूँ² रे, बीजुँ³ पारे शुँ कहूँ।
शुँ कहूँ रे सुन्दर श्याम, बीजाने⁵ मारे शुँ कहूँ।
नित्य उठी शुभे नाहि अने धोई अने रे, ध्यान धणीतर्णु धरीए रे।
साधु जन ने जमाडीओ⁴ वाला, जूठूं वधे⁶ ते अमे जभीए रे।
वृन्द ते वन माँ राच्यो रे वाला, राम मडल माँ तो अमे रमीए रे।
हरि ने चीर काम न आवे वाला, भगवाँ पहरीने अमे भभीए रे।
बाई मीराँ के प्रभु-गिरिधर नागर, चरण कमल माँ चित धरीए रे।
॥३७१॥
पदाभिव्यक्तिमे वह गाम्भीर्य पूर्ण मधुरता नही जो मीराँ के
पदो की विशेषता है।
१ मत कर, २ धरना, ३ दूसरा, ४ भोजन करा कर, ५ दूसरे का,
६ बढे।