मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in context"दासी" और "जन" प्रयोग युक्त पद २०१
तेने खुणे बेसी ने मै तो झीनुँ कातिउं रे, ते नथि राख्युँ काई काचुँ रे ।
दासी मीरा बाई गिरधर गुन गावे, तारा ऑगनिए माँ थेइ थेइ नाचुँ रे ।
॥३२५॥†
उपर्युक्त पद की प्रथम दो पंक्तियाँ शेष पद से सर्वथा भिन्न पडती
हैं। इन दो पंक्तियो को छोड कर शेष पद से एक निम्न स्तर के घरेलू
जीवन का ही चित्र स्पष्ट हो उठता है। ऐसे पदो की प्रामाणिकता
आमन्य ही प्रतीत होती है—(देखे,मीराँ,एक अध्ययन) पद की अन्तिम
पंक्ति से भी अन्योक्ति ही स्पष्ट हो उठती है।
५
भजलो नी सन्तो भजला नी साधो, रामजी बिन्ना कैसो जीवन रे।
तन तो बनाऊ तम्बूरो जीवन नो तार तनाऊ र् राम।
बन बन बाजे घूघरा, जीवने लाइ लडाऊं राम।
ऑगनिये अनियारा आटला (?) मन्दिर लीटया दीसे राम।
शेर अनाज ने सेवता जीवडा जाता ने हीसे राम।
काया ने आना आविया, ज्यो पाछा न पुरे राम।
सात सहेली ना झूमख मा, जीवने नागल बरावे राम।
तल तल होमिया, जरा आज्ञा न मोड़ूँ राम।
जीवड़ो जाय तो आवा देऊ, हरी ने भक्ती ना छोड़ूँ राम।
नी ने किनारे ˙नैने नीर बहे बडाऊ राम।
कान्ह जी ने हाथ नी रेखा ड़े,बिन चम्पे कलियो आवे राम।
दास मीरा बाई नी बिनती, डाकुर दासी तुझ गहाऊ राम ॥३२६॥†
पद में पूर्वापर सम्बन्ध का अभाव है।