मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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३
विट्ठल वाहेला आवोरे, वाटडी जाऊ हरखि निरखि मन मोहियुँ रे
वाही गाऊ। टेक।
वाहला म्हारा रसोई बनावी छे, सारी^१ की धी^२ छे सुन्दर थारी रे।
वाहला म्हारा केसर पिरसियो छे, प्रीते प्रभु जमो^३ पूरन प्रीत रे।
वाहला म्हारा दालि भात ने कढी, वडी सामाग्री सव की धी रे।
वाहला म्हांरा राइता शाक,पापड छे साराँ^४ तम जमो प्रीतम मारा रे।
वाहला म्हांरा शरमाशो नही वारू कई कहे जो खाहुं खारुं रे।
वाहला म्हांरा कनक नी झारी भरि लाई तमने आचमन लेव रावुँ रे।
वाहला म्हारा मुखवास^५ लावी हूँ सारो, तमे उठो सेजे पधारो रे।
वाहला म्हांरा हेते रहो भुज पास, गुण गाय तेरी मीरा दास रे ॥३२४॥†
ऐसी हल्की भावाभिव्यक्ति वाले पदो की प्रामाणिकता सर्वथा
अमान्य है। (देखे मीरा एक अध्ययन)।
४
जेने मारा प्रभुजी ने भक्ति न भावे रे, तेदे घर सीद जइये रे।
जेने घर सन्त पाहुनो न आवे रे, तेने घर सीद जइये रे।
स्वसुरो अमारो अग्नि नो भड़को, सासू सदानी सूली रे।
एनी प्रत्ये मारु काई ना चाले रे, एने ऑगनिये नाखूं पूला रे।
जेठानी हमारी भवरानु जालु, देयरानी तो दिल माँ दाजी रे।
नान्ही ननद तो मो मचोकडे ते भाग्ये हमारे कर मे पाजी रे।
.............. ,ते बलता माँ नाके, छे वारी रे।
मारा घर पछवाड़े सीद पड़ी छे, बाई तु जीती हुं हारी रे।
१ अच्छी, २ किया है, ३ भोजन करो, ४ अच्छा, ५ भोजनोपरान्त
मुखशुद्धि हेतु पान आदि।