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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

Page 207 of 365

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Page 207

मिलन और बधाई १४९
फुलना रे तोडा,$^१$ फुलना रे गजरा,$^२$ फुलना रे हार फल पाखडी।
फुलना रे गादी फुलना रे तकिया, फुलना री पाथरी पछेडी।
पय पकवान मिठाई ने मेवा, सेवेया ने सुन्दर दहीडी।
लवग सुपारी ने एलची, तजवाला कथा पुरारी पान बीडी।
सेज बिछाऊ ने पासा मगाऊ, रमवा आवो तो जाय रातड़ी ॥२३६॥†
मीराँ के नाम पर प्रचलित इस पद के किसी भी अंश से इसका
मीराँ विरचित होना आभासित नही होता। ऐसो पदो को प्रामाणिक
सग्रह मे स्थान न देना ही युक्तियुक्त प्रतीत होता है। किसी किसी
सग्रह मे निम्नाकित एक पक्ति और भी मिलती है जिसके आधार पर
पद को मीराँ का कहा जा सकता है।
'मीराँ के प्रभु गिरिधर नागर, वाँला राम ने जोता ठरे आखडी।
इस पक्ति से व्यक्त होती भावना का शेष पदाभिव्यक्ति से कोई
सगति नही बैठती। फिर गुजराती मे प्राप्त मीराँ के पदो की अन्तिम
पक्ति मे 'मीराँ के प्रभु गिरधर नागर' के बदले "मीराँ के प्रभु गिरधर
ना गुण' का ही प्रयोग मिलता है। ऐसी स्थिति मे उपर्युक्त पक्ति के
आधार पर भी पद की प्रामाणिकता सिद्ध नही होती।
३
अबोला सीद लोछी मारा राज, प्राण जीवन प्रभु मारा म्हांरा राज।
अमे तो तमारा तमे तो अमारा, टाली दोस दो छोरे।
अमे तो तमारी सेवा करीये, सुख लई ने दुख दो छोरे।
जेने पोतानी मासी भारी, तेनी सो विश्वास रे।
अमृत पाई ने उच्छेरिया वाँला, बिखडा घोलि घोलि शीद पावो छोरे।
१ हाथो मे पहनने का जेवर विशेष, २ हार।