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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

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DevanagariRajasthanipublished365 pages

Page 206 of 365

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Page 206

१४८ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
गुजराती में प्राप्त पद
१
मने मलिया मित्र गोपाल, नही जाऊ सासराए ।
ससार मारूँ हो सासुरो ने बैकुंठ मारो वास रे ।
लक्ष चौरासी मारो हो चुड़ोलो रे, हारे मै तो वरिया गोपाल लाल नाथ ।
सासु हमारी शुशुमना रे, सुसरी प्रेम सतोष रे ।
जेठ जुगे जुग जीव जो रे, हा रे पेलो नावलियो निरदोस ।
आपूँ तो नवरग चूंदडी रे, नही ओढूँ कामल लगार रे ।
ओढूँ प्रेम रस चूंदडी रे, हाँ रे मारा पाप निवारण करनार ।
दियरे¹ ने दीनूँ है दीकडी² रे, दोनूँ राजकुमार रे ।
एक ने सतयुग मोहि रहियो, राणा, दूजी रही ब्रह्मचार ।
एक एक नो गुरु गोविन्द जी हो रे, दूजी की है ससार रे ।
राज छाड़ौ चित्रकूट नेरे हाला, बाला गावला सोल हजार ।
अपना पिया को जाई ने कह जो, घना दहाडो³ धना वास रे ।
बेऊँ⁴ कर जोडी हो निनवरे, हा रे गुण गावे मीराबाई दास ॥२३५॥†
पदाभिव्यक्ति विशेष विचारणीय ह। यद्यपि अभिव्यक्ति अस्पष्ट
और कही कही असगत भी है, तथापि सतमत का प्रभाव विशेष रूपम
इंगित हो जाता है।
अन्तिम पक्ति मे 'मीराबाई दास' जैसा प्रयोग इस पद की विशे-
षता है। इस प्रयोग के आधार पर पद की प्रामाणिकता और भी
सदिग्ध हो उठती है।
२
अरज करे छे मीरा राकडी, ऊंभी ऊभी अरज करे छे ।
मणिधर स्वामी म्हारे मादेर पधारी, सेवा करु दिन रातडी ।
१ देवर, २ दीकडी अशुद्ध है, शुद्ध शब्द हैडीकरी, जिसका अर्थ हैं पुत्री, ३ दिन,
४ दोनो।