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मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)

Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary

by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव

DevanagariRajasthanipublished365 pages

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१३४ मीराँ-बृहद्-पद-संग्रह
जोती मीराँ एकली रे, हारी राणा की धार।
काचगिरी का चौतरा रे, बैठे साध पचास।
जिन मे मीराँ ऐसी दमके, लख तारो मे परकास।
टाडा जब वे लादिया रे, बेगी दीन्हा जाण।
कुल की तारण अस्तरी रे, चली है पुष्कर न्हाण ॥२१४॥
पद की शैली और अभिव्यक्ति ही पद को प्रक्षिप्त सिद्ध करती
है। पद का प्रारम्भ होता है दृढ विश्वास की अभिव्यक्ति से, परन्तु
दूसरी ही पंक्ति मे भावना बदल जाती है। चार पक्तियो मे राणा
और मीराँ के बीच संवाद है। संवाद की अभिव्यक्ति विरोधमय है।
शेष पदाश से मीराँ का गहरा सघर्ष और दृढ भक्ति भावना की ही
प्रशस्त अभिव्यक्ति होती है। अन्तिम दोनो पक्तियाँ घटनाद्योतक
हैं जिनसे मालूम होता है कि “कुल की तारण अस्तरी” मीराँ पुष्कर
नहाने के लिए जा रही हैं।
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