मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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Read in contextसंघर्षाभिव्यक्ति १३३
राणा जी ना देशमा मारे जलरे पीवा नो दोशं । ,,
डाबो मैल्यो मेवाड रे, मीराँ गई पश्चिम माय । ,,
सरब छोड़ी ने मीराँ नीसयो, जेयुँ भायामा मनहु न काय । ,,
सासु हमारी सुषमणा ॰रे, ससरो प्रेम सन्तोष । ,,
जेठ जगजीवन जगत मा, भारो नावलियो निर्दोष । ,,
चूँदड़ी ओढूँ त्यारो रंग चुवे रे, रग बेरंगी होय । ,,
औढूँ छुँ कालो कामलो, दूजौ दाग न लागे कोय । ,,
मीराँ हरिणी लाडली रे, रेहती संत हजूर । ,,
साधु संघाते स्नेह घणो, पेला कपटी थी दिल दूर ॥२१३॥†
उपर्युक्त पद राजस्थानी मे प्राप्त संघर्ष द्योतक विभिन्न पदो के
विभिन्न अशो का सम्मिश्रण ही प्रतीत होता है। पद के उत्तरार्द्ध से
सत मत का प्रभाव स्पष्ट है। इसी तरह की अभिव्यक्ति अन्य सत
मत प्रभावद्योतक पदो मे भी मिलती है।
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म्हांरे सिर पर सालिग्राम, राणाजी म्हारे काई करसी ।
मीराँ सूं राणा ने कही रे, सुण मीराँ मोरी बात ।
साधो की संगत छोड़ दे रे, सखियां सब सकुचात ।
मीराँ ने सुन यो कही रे, सुन राणा जी बात ।
साध तो माई बाप हमारे, सखियां क्यूँ घबरात ।
जहर का प्याला भेजियारे, दीजो मीराँ हाथ ।
अमृत कर के पी गई रे, भली करें दीनानाथ ।
मीराँ प्याला पी लियारे, बोली दोउ कर जोर ।
तैं तो मारण की करी रे, मेरो राखणहारो और ।
आधे जोहड़ कीच है रे, आंध जोहड हौज़ ।
आंध मीराँ एकली रे, आंधे राणा की फौज ।
काम क्रोध को ड़ालकेर, सील लिए हथियार ।