मीराँ बृहद् पदावली (भक्त शिरोमणि मीराबाई - सम्पूर्ण पद सटीक)
Meera Brihad Padavali with Hindi Commentary
by भक्त शिरोमणि मीराबाई / डॉ. मुरलीधर श्रीवास्तव
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३
पिया मोँहि दरसण दीजै हो।
बेर बेर मै टेर हूँ, अहे किरपा कीजै हो।
जेठ महीने जल बिना, पछी दुख दई हो।
मोर असाढो कुरल हे, घन चात्रग सोई हो।
सावण मे झड लागीयो, सखी तीजा खेले हो।
भादरवे नहिया बहै, दूरि जिन मेलो हो।
देव काती मे पूज है, मेरे तुम होई हो।
मगसर ठड बहोती पडै, मोहि बेगि सम्हालो हो।
पोस माही पाला घणा, अब ही तुम न्हालो हो।
माह मही बसत पचमी, फागाँ सब गावे हो।
चेत चित मे ऊपजी, दरसण तुम दीजै हो।
वैसाख वणराइ फूलवे, कोइल कुरलीजै हो।
काग उडावता दिन गयौ, बुझूँ पिडत जोशी हो।
मीराँ व्याकुल विरहणी, दरसण कद होशी हो। ॥८४॥†
मीराँ के नाम पर प्रचलित पदो मे ‘बारह मासें’ की शैली पर यही
एक पद है। इस पद की विशेष आलोचना देखे, ‘मीराँ, एक अध्ययन’ मे।
४
नीदडली नही आवै सारी रात, किस बिध¹ होई परभात।
चमक उठी सुपने सुध भूली, चन्द्रकला न सोहात।
तलफ तलफ जिय जाय हमारो, कबरे मिले दीनानाथ।
भई हूँ दिवानी तन सुध भूली, कोई न जानी म्हारी बात।
मीराँ कहै बीती सोइ जाने, मरण जीवन उन हाथ। ॥८५॥
१ किस तरह।