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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

by महर्षि मनु

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished649 pages

Page 560 of 649

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Page 560

४२० मनुस्मृति।
मार्जारनकुलौ हत्वा चाषं मण्डूकमेव च ।
श्वगोधोलूककाकांश्च शूद्रहत्या व्रतं चरेत् ॥ १३२ ॥
पयः पिवेत् त्रिरात्रं वा योजनं वाध्वनो व्रजेत् ।
उपस्पृशेत्स्रवन्त्यां वा सूक्तं वाब्दैवतं जपेत् ॥ १३३ ॥
अस्त्रिं कार्ष्णायसीं दद्यात् सर्पं हत्वा द्विजोत्तमः ।
पलालभारकं षण्ढे सैसकञ्चैक्रमाषकम् ॥ १३४ ॥
घृतकुम्भं वराहे तु तिलद्रोणन्तु तित्तिरौ ।
शुके द्विहायनं वत्सं क्रौञ्चं हत्वा त्रिहायनम् ॥ १३५ ॥
हत्वा हंसं बलाकां च बकं बर्हिणमेव च ।
वानरं श्येनभासौ च स्पर्शयेद्ब्राह्मणाय गाम् १३६ ॥
अथवा वह पुरुष ग्राम से दूर वृक्ष के नीचे जटा रखकर एक
वर्ष तक ब्रह्महत्या का प्रायश्चित्त करे। और यहीं प्रायश्चित्त अ-
ज्ञान में सदाचारी वैश्य के वध में भी जानना चाहिए। और एकसौ
गौ का दान करना चाहिए। शूद्रवध में भी यही सब प्रायश्चित्त
छः मास तक करना दश श्वेतगौ और एक बैल दान करना चाहिए।
विलाव, नौला, पपीहा, मेंडक, कुत्ता, छिपकली, उल्लू और कौआ
को अनजान में मारकर शूद्रहत्या का व्रत करे। अथवा तीन रात
तक दूध पीकर रहे या एक योजन तक मार्ग चले या तीनबार
नदी में स्नान करे या ‘आपोहिष्ठा’ इत्यादि वरुणसूक्त का पाठ
करे। द्विज सर्प का वध करे तो तीखे नोक का-लोह का दण्डा
दान करे। नपुंसक का वध करने पर एक भार पयाल वा एक
मासा सीसा देय। सूअर के वध में घी भरा घड़ा, तीतर मारने
पर एक द्रोण तेल, तोता की हत्या में दो वर्ष का बछड़ा, क्रौञ्च-
वध में तीन वर्ष का बछड़ा दान करे। हंस, बगली, बगला, मोर,
वानर, बाज और भास इन पक्षियों को मारकर ब्राह्मण को गो-
दान करे तब पाप से शुद्ध होता है ॥ १२६-१३६॥