मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
by महर्षि मनु
Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)
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Read in contextआठवां अध्याय । ३१७
तौ हि च्युतौ स्वकर्मभ्यः क्षोभयेतामिदं जगत्॥४१८॥
अह्न्यहन्यवेक्षेत कर्मान् तान् वाहनानि च ।
आयव्ययौ च नियतावाकरान् कोशमेव च ॥ ४१९ ॥
एवं सर्वानिमान् राजा व्यवहारान् समापयन् ।
व्यपोह्य किल्बिषं सर्वं प्राप्नोति परमां गतिम्॥ ४२० ॥
इति मानवे धर्मशास्त्रे भृगुप्रोक्तायां संहिताया-
मष्टमोऽध्यायः ॥ ८ ॥
राजा यत्नपूर्वक वैश्य और शूद्रसे उनके कर्मों को करावे क्योंकि
वे अपने कर्म से हटकर संसार को उपद्रवों से दुखी करेंगे।
राजा प्रतिदिन आरम्भ किये कार्यों का, सवारियों का, नियत
आय-व्यय, खान और धन-भण्डार का अवलोकन करे। इस प्रकार
राजा इन सब व्यवहारों का निर्णय करता हुआ सब पापों का
नाश करके परम गति को पाता है ॥ ४१८-४२० ॥
आठवां अध्याय पूरा हुआ।