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मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)

Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation

by महर्षि मनु

Source: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (origin)

DevanagariSanskritpublished649 pages

Page 238 of 649

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Page 238

६८ मनुस्मृति ।
यस्मादुत्पत्तिरेतेषां सर्वेषामप्यशेषतः ।
ये च यैरुपचर्याः स्युर्नियमैस्तान्निबोधत ॥ १९३ ॥
मनोर्हैरण्यगर्भस्य ये मरीच्यादयः सुताः ।
तेषामृषीणां सर्वेषां पुत्राः पितृगणाः स्मृताः ॥१९४॥
विराट्सुताः सोमसदः साध्यानां पितरः स्मृताः ।
अग्निष्वात्ताश्च देवानां मारीचा लोकविश्रुताः॥ १९५॥
दैत्यदानवयक्षाणां गन्धर्वोरगरक्षसाम् ।
सुपर्णकिन्नराणां च स्मृता बर्हिषदोऽद्विजाः ॥ १९६ ॥
इन सब पितरों की जिससे उत्पत्ति हुई है और जो पितर जिन
नियमों से जिसके पूज्य हैं वह सुनो । हिरण्यगर्भ के पुत्र मनु के
जो मरीचि आदि पुत्र हैं, उनके पुत्र सोमपा आदि पितृगण हैं।
विराट् के पुत्र सोमसद्‌नामक साध्यों के पितर हैं और मरीचि
के पुत्र अग्निष्वात्त देवताओं के पितर कहे जाते हैं । दैत्य,
दानव, यक्ष, गन्धर्व, सर्प, पक्षी और किन्नरों के बर्हिषद्‌नामक
पितर हैं ॥ १९३–१९६ ॥
सोमपानाम विप्राणां क्षत्रियाणां हविर्भुजः ।
वैश्यानामाज्यपानाम शूद्राणां तु सुकालिनः ॥१९७॥
सोमपास्तु कवेः पुत्रा हविष्मन्तोऽङ्गिरःसुताः ।
पुलस्त्यस्याज्यपाः पुत्रा वशिष्ठस्य सुकालिनः ॥ १९८॥
अग्निदग्धानग्निदग्धान्काव्यान्र्वाहिषदस्तथा ।
अग्निष्वात्तांश्च सौम्यांश्च विप्राणामेव निर्दिशेत्॥१९६॥
य एते तु गणा मुख्याः पितॄणां परिकीर्त्तिताः ।
तेषामपीह विज्ञेयं पुत्रपौत्रमनन्तकम् ॥ २०० ॥
सोमपा ब्राह्मणों के, हविर्भुज क्षत्रियों के, आज्यपा वैश्यों के
और सुकालिन‌नामक शूद्रों के पितर हैं । सोमपा भृगु के पुत्र,