मनुस्मृति (कुल्लूकभट्ट टीका व हिन्दी अनुवाद सहित)
Manusmriti with Kulluka Bhatta Tika & Hindi Translation
महर्षि मनु द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
पृष्ठ 13, कुल 649 में से
संदर्भ में पढ़ेंभूमिका । ११
शिक्षा, कात्यायन शिक्षा, वशिष्ठ शिक्षा आदि अनेक शिक्षा-
ग्रन्थ हैं ।
२ । कल्प ।
वेदोक्त कर्मों का यथावत् कल्पना जिसमें हो वह कल्प
कहलाता है । कल्प दो प्रकार का है-एक श्रौतकल्प, दूसरा
स्मार्तकल्प । ये दोनों ग्रन्थ वेदभेद अथवा शाखाभेद से
भिन्न भिन्न हैं । श्रौतकल्प श्रौतसूत्र नाम से और स्मार्तकल्प
स्मार्तसूत्र नाम से अथवा गृह्यसूत्र नाम से कहा जाता है ।
३ । व्याकरण ।
वार्तिककार-कात्यायन और भाष्यकार पतञ्जलि द्वारा
उन्नत पाणिनीय ( पाणिनिप्रोक्त अष्टाध्यायी ) व्याकरण ।
और वैदिक शब्दानुशासन के उपयोगी प्रातिशाख्य
ग्रन्थ ।
४ । निरुक्त ।
वेदार्थ के ज्ञान में अत्यन्त उपकारी यास्कमुनि कृत-
निरुक्त । जिसके नैघण्टुक, नैगम और दैवत संज्ञक तीन
काण्ड हैं ।
'आद्यं नैघण्टुकं काण्डं द्वितीयं नैगमं तथा ।
तृतीयं दैवतं चेति समाम्नायस्त्रिधा मतः ॥'
५ । छन्द ।
पिङ्गल-मुनिप्रणीत छन्द, जो वैदिक तथा लौकिक भेदसे
दो प्रकार का है ।