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मनहिं निरंजन सबै नचाए

मनहिं निरंजन सबै नचाए

Manhin Niranjan Sabai Nachaye

by सतगुरु मधु परमहंस जी

Source: साहिब बंदगी आध्यात्मिक संस्थान · साहिब बंदगी (origin)

Devanagarihipublished120 pages

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ठीक नहीं है; अभी बात नहीं करो। यह क्या है मूड? यह मन की स्थिति है।

पश्चिम दल पर जब मन जाई। विषय वासना उर में आई ॥

जब पश्चिम के कोष्ठक पर मन जाकर के बैठता है तो आदमी में बहुत वासना आयेगी, विषय-विकारों का चिंतन आयेगा, फ़िजूल-2 बातें, अगली-पिछली बातें याद आयेंगी। आप सोचने लग जायेंगे। पर आपको यह पता नहीं चलेगा कि आपमें ये विचार उत्पन्न क्यों हो रहे हैं। यह भी मन का खेल है। इसको बड़े बड़े ज्ञानी-ध्यानी नहीं देख पा रहे हैं।

पूर्व दल पर जब मन जाई। हँसी भाव तब उर में आई ॥

पूर्व के पते पर जब मन का निवास हो जाता है तो हँसने की इच्छा होगी। फ़िजूल बातों पर भी आप हँसेंगे। इधर-उधर की बातों पर हँसेंगे। बस, आपका मूड होगा कि हँसू, हँसू। कभी-कभी ऐसी अवस्था बन जाती है। किसी को चलते देखोगे, तो भी हँसी आ जायेगी। कभी-कभी आप आदमी को ऐसी अवस्था में देखकर पूछते हैं कि भाई, बात क्या है? क्यों हँस रहे हो? वो खुद नहीं जानता है कि क्यों हँस रहा है। क्योंकि मन पूर्व-दल पर जाकर बैठा है। इसलिए उतनी देर आपको हँसना-ही-हँसना है। बिना मतलब की बातों पर भी हँसना-ही-हँसना है। आपको हँसी आयेगी। आपका स्वभाव ऐसा बनेगा।

आठ दिशाएँ हैं—पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण। फिर वायु, अग्नि, नैऋत, इशान—ये चार कोने वाली दिशाएँ भी हैं।

वायु दल पर जब मन जाई। लोभ भाव तब उर में आई ॥

इतनी देर लालच आयेगी। वो डेढ़-दो घण्टा, जितनी देर मन वहाँ रहा, यही प्लैनिंग रहेगी कि पैसा कहाँ से आए, यह करूँगा, वो करूँगा। आपमें ये ही सोच आती रहेगी। आपमें यह सोच क्यों आई? आपको कोई पता नहीं है। क्योंकि मन उस कोष्ठक पर जाकर बैठ गया है। जितनी देर भी वहाँ रहा, उतनी देर ये ही विचार आते रहेंगे। इसका