सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1627, कुल 2566 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1627

⬅ विषय-सूची (TOC)

एकादशोऽध्यायः

श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको इन्द्रद्वारा शरीरस्थ वृत्रासुरका संहार करनेका इतिहास सुनाकर समझाना

वैशम्पायन उवाच

इत्युक्ते नृपतौ तस्मिन् व्यासेनाद्भुतकर्मणा ।
वासुदेवो महातेजास्ततो वचनमाददे ॥ १ ॥

**वैशम्पायनजी कहते हैं—**जनमेजय! अद्भुत-कर्मा वेदव्यासजीने युधिष्ठिरसे इस प्रकार कहा, तब महातेजस्वी भगवान् श्रीकृष्ण कुछ कहनेको उद्यत हुए ॥ १ ॥

तं नृपं दीनमनसं निहतज्ञातिबान्धवम् ।
उपप्लुतमिवादित्यं सधूममिव पावकम् ॥ २ ॥
निर्विण्णमनसं पार्थं ज्ञात्वा वृष्णिकुलोद्वहः ।
आश्वासयन् धर्मसुतं प्रवक्तुमुपचक्रमे ॥ ३ ॥

जाति-भाइयोंके मारे जानेसे युधिष्ठिरका मन शोकसे दीन एवं व्याकुल हो रहा था। वे राहुग्रस्त सूर्य और धूमयुक्त अग्निके समान निस्तेज हो गये थे। विशेषतः उनका मन राज्यकी ओरसे खिन्न एवं विरक्त हो गया था। यह सब जानकर वृष्णिवंशभूषण श्रीकृष्णने कुन्तीकुमार धर्मपुत्र युधिष्ठिरको आश्वासन देते हुए इस प्रकार कहना आरम्भ किया ॥ २-३ ॥

वासुदेव उवाच

सर्वं जिह्मं मृत्युपदमार्जवं ब्रह्मणः पदम् ।
एतावान् ज्ञानविषयः किं प्रलापः करिष्यति ॥ ४ ॥

**भगवान् श्रीकृष्णने कहा—**धर्मराज! कुटिलता मृत्युका स्थान है और सरलता ब्रह्मकी प्राप्तिका साधन है। इस बातको ठीक-ठीक समझ लेना ही ज्ञानका विषय है। इसके विपरीत जो कुछ कहा जाता है, वह प्रलाप है। भला वह किसीका क्या उपकार करेगा? ॥ ४ ॥

नैव ते निष्ठितं कर्म नैव ते शत्रवो जिताः ।
कथं शत्रुं शरीरस्थमात्मनो नावबुध्यसे ॥ ५ ॥

आपने अपने कर्तव्यकर्मको पूरा नहीं किया। आपने अभीतक शत्रुओंपर विजय भी नहीं पायी। आपका शत्रु तो आपके शरीरके भीतर ही बैठा हुआ है। आप अपने उस शत्रुको क्यों नहीं पहचानते हैं? ॥ ५ ॥

अत्र ते वर्तयिष्यामि यथाधर्मं यथाश्रुतम् ।

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व · पृष्ठ 1627, कुल 2566 में से · SarvaKosh