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महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,566 pages

Page 1389 of 2566

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षट्चत्वारिंशदधिकशततमोऽध्यायः

पार्वतीजीके द्वारा स्त्री-धर्मका वर्णन

नारद उवाच

एवमुक्त्वा महादेवः श्रोतुकामः स्वयं प्रभुः ।
अनुकूलां प्रियां भार्या पार्श्वस्थां समभाषत ।। १ ।।
**नारदजी कहते हैं—**ऐसा कहकर महादेवजी स्वयं भी पार्वतीजीके मुँहसे कुछ सुननेकी इच्छा करने लगे। अतएव स्वयं भगवान् शिवने पास ही बैठी हुई अपनी प्रिय एवं अनुकूल भार्या पार्वतीसे कहा ।। १ ।।

श्रीमहेश्वर उवाच

परावरज्ञे धर्मज्ञे तपोवननिवासिनि ।
साध्वि सुभ्रु सुकेशान्ते हिमवत्पर्वतात्मजे ।। २ ।।
दक्षे शमदमोपेते निर्ममे धर्मचारिणि ।
पृच्छामि त्वां वरारोहे पृष्टा वद ममेप्सितम् ।। ३ ।।
**श्रीमहेश्वर बोले—**तपोवनमें निवास करनेवाली देवि! तुम भूत और भविष्यको जाननेवाली, धर्मके तत्त्वको समझनेवाली और स्वयं भी धर्मका आचरण करनेवाली हो। सुन्दर केशों और भौंहोंवाली सती-साध्वी हिमवान्-कुमारी! तुम कार्यकुशल हो, इन्द्रियसंयम और मनोनिग्रहसे भी सम्पन्न हो। तुममें अहंता और ममताका सर्वथा अभाव है; अतः वरारोहे! मैं तुमसे एक बात पूछता हूँ। मेरे पूछनेपर तुम मुझे मेरे अभीष्ट विषयको बताओ ।।

सावित्री ब्रह्मणःसाध्वी कौशिकस्य शची सती ।
(लक्ष्मीर्विष्णोः प्रिया भार्या धृतिर्भार्या यमस्य तु)
मार्कण्डेयस्य धूमोर्णा ऋद्धिवैश्रवणस्य च ।। ४ ।।
वरुणस्य तथा गौरी सूर्यस्य च सुवर्चला ।
रोहिणी शशिनः साध्वी स्वाहा चैव विभावसोः ।। ५ ।।
अदितिः कश्यपस्याथ सर्वास्ताः पतिदेवताः ।
पृष्टाश्चोपासिताश्चैव तास्त्वया देवि नित्यशः ।। ६ ।।
ब्रह्माजीकी पत्नी सावित्री साध्वी हैं। इन्द्रपत्नी शची भी सती हैं। विष्णुकी प्यारी पत्नी लक्ष्मी पतिव्रता हैं। इसी प्रकार यमकी भार्या धृति, मार्कण्डेयकी पत्नी धूमोर्णा, कुबेरकी स्त्री ऋद्धि, वरुणकी भार्या गौरी, सूर्यकी पत्नी सुवर्चला, चन्द्रमाकी साध्वी स्त्री रोहिणी,