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सर्वकोश
महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

महाभारत (खंड ६) - अनुशासन, आश्वमेधिक, आश्रमवासिक, मौसल, महाप्रस्थानिक, स्वर्गारोहण व हरिवंश पर्व

Mahabharata (Vol 6) - Anushasana to Harivamsa Parva

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariSanskritpublished2,566 पृष्ठ

पृष्ठ 1148, कुल 2566 में से

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पृष्ठ 1148

उमोवाच
वाहनेष्वत्र सर्वेषु श्रीमत्स्वन्येषु सत्तम ।
कथं च वृषभो देव वाहनत्वमुपागतः ॥ ९ ॥
उमाने पूछा—सत्पुरुषोंमें श्रेष्ठ महादेव! इस जगत्में अन्य सब सुन्दर वाहनोंके होते हुए क्यों वृषभ ही आपका वाहन बना है? ॥ ९ ॥

श्रीमहेश्वर उवाच
सुरभीमसृजद् ब्रह्मा देवधेनुं पयोमुचम् ।
सा सृष्टा बहुधा जाता क्षरमाणा पयोऽमृतम् ॥ १० ॥
श्रीमहेश्वरने कहा—प्रिये! ब्रह्माजीने देवताओंके लिये दूध देनेवाली सुरभि नामक गायकी सृष्टि की, जो मेघके समान दूधरूपी जलकी वर्षा करनेवाली थी। उत्पन्न हुई सुरभि अमृतमय दूध बहाती हुई अनेक रूपोंमें प्रकट हो गयी ॥ १० ॥
तस्या वत्समु खोत्सृष्टः फेनो मद्गात्रमागतः ।
ततो दग्धा मया गावो नानावर्णत्वमागताः ॥ ११ ॥
एक दिन उसके बछड़ेके मुखसे निकला हुआ फेन मेरे शरीरपर पड़ गया। इससे मैंने कुपित होकर गौओंको ताप देना आरम्भ किया। मेरे रोषमें दग्ध हुई गौओंके रंग नाना प्रकारके हो गये ॥ ११ ॥
ततोऽहं लोकगुरुणा शमं नीतोऽर्थवेदिना ।
वृषं चैनं ध्वजार्थं मे ददौ वाहनमेव च ॥ १२ ॥
अब अर्थनीतिके ज्ञाता लोकगुरु ब्रह्माने मुझे शान्त किया तथा ध्वज-चिह्न और वाहनके रूपमें यह वृषभ मुझे प्रदान किया ॥ १२ ॥

उमोवाच
निवासा बहुरूपास्ते दिवि सर्वगुणान्विताः ।
तांश्च संत्यज्य भगवन् श्मशाने रमसे कथम् ॥ १३ ॥
उमाने पूछा—भगवन्! स्वर्गलोकमें अनेक प्रकारके सर्वगुणसम्पन्न निवासस्थान हैं, उन सबको छोड़कर आप श्मशान-भूमिमें कैसे रमते हैं? ॥ १३ ॥
केशास्थिकलिला भीमे कपालघटसंकुले ।
गृध्रगोमायुबहुले चिताग्निशतसंकुले ॥ १४ ॥
अशुचौ मांसकलिले वसाशोणितकर्दमे ।
विकीर्णान्त्रास्थिनिचये शिवानादविनादिते ॥ १५ ॥
श्मशानभूमि तो केशों और हड्डियोंसे भरी होती है। उस भयानक भूमिमें मनुष्योंकी खोपड़ियाँ और घड़ें पड़े रहते हैं। गीधों और गीदड़ोंकी जमातें जुटी रहती हैं। वहाँ सब ओर चिताएँ जला करती हैं। मांस, वसा और रक्तकी कीच-सी मची रहती है। बिखरी हुई