महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
Page 265 of 3237
Read in contextद्वात्रिंशोऽध्यायः
कौरव-पाण्डव-सेनाओंका घमासान युद्ध, भीमसेनका कौरव महारथियोंके साथ संग्राम, भयंकर संहार, पाण्डवोंका द्रोणाचार्यपर आक्रमण, अर्जुन और कर्णका युद्ध, कर्णके भाइयोंका वध तथा कर्ण और सात्यकिका संग्राम
संजय उवाच
प्रतिघातं तु सैन्यस्य नामृष्यत वृकोदरः ।
सोऽभ्याहनद् गुरुं षष्ट्या कर्णं च दशभिः शरैः ॥ १ ॥
संजय कहते हैं— महाराज! अपनी सेनाका वह विनाश भीमसेनसे नहीं सहा गया। उन्होंने गुरुदेवको साठ और कर्णको दस बाणोंसे घायल कर दिया ॥ १ ॥
तस्य द्रोणः शितैर्बाणैस्तीक्ष्णधारैरजिह्मगैः ।
जीवितान्तमभिप्रेप्सुर्मर्माण्याशु जघान ह ॥ २ ॥
तब द्रोणाचार्यने सीधे जानेवाले, तीखी धारसे युक्त पैने बाणोंद्वारा शीघ्रतापूर्वक भीमसेनके मर्मस्थानोंपर आघात किया। वे भीमसेनके प्राणोंका अन्त कर देना चाहते थे ॥ २ ॥
आनन्तर्यमभिप्रेप्सुः षड्विंशत्या समर्पयत् ।
कर्णो द्वादशभिर्बाणैरश्वत्थामा च सप्तभिः ॥ ३ ॥
इस आघात-प्रतिघातको निरन्तर जारी रखनेकी इच्छासे द्रोणाचार्यने भीमसेनको छब्बीस, कर्णने बारह और अश्वत्थामाने सात बाण मारे ॥ ३ ॥
षड्भिर्दुर्योधनो राजा तत एनमथाकिरत् ।
भीमसेनोऽपि तान् सर्वान् प्रत्यविध्यन्महाबलः ॥ ४ ॥
तदनन्तर राजा दुर्योधनने उनके ऊपर छः बाणोंद्वारा प्रहार किया। फिर महाबली भीमसेनने उन सबको अपने बाणोंद्वारा घायल कर दिया ॥ ४ ॥
द्रोणं पञ्चाशतेषूणां कर्णं च दशभिः शरैः ।
दुर्योधनं द्वादशभिर्द्रौणिमष्टाभिराशुगैः ॥ ५ ॥
उन्होंने द्रोणको पचास, कर्णको दस, दुर्योधनको बारह और अश्वत्थामाको आठ बाण मारे ॥ ५ ॥
आरावं तुमुलं कुर्वन्नभ्यवर्तत तान् रणे ।
तस्मिन् संत्यजति प्राणान् मृत्युसाधारणीकृते ॥ ६ ॥