महाभारत (खंड ४) - द्रोण, कर्ण, शल्य, सौप्तिक व स्त्री पर्व
Mahabharata (Vol 4) - Drona, Karna, Shalya, Sauptika and Stri Parva
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 2212, कुल 3237 में से
संदर्भ में पढ़ेंवायुवद् व्यचरद् भीमो वायुपुत्रः प्रतापवान् ॥ २५ ॥
प्रतापी वायुपुत्र भीमसेन वायुके समान वेगशाली थे। बल और पराक्रममें भी वायुकी ही समानता रखते थे। वे उस रणभूमिमें वायुके समान विचरण करने लगे ॥ २५ ॥
तेनार्द्यमाना राजेन्द्र सेना तव विशाम्पते ।
व्यभ्रश्यत महाराज भिन्ना नौरिव सागरे ॥ २६ ॥
महाराज! प्रजानाथ! राजेन्द्र! उनसे पीड़ित हुई आपकी सेना समुद्रमें टूटी हुई नावके समान पथभ्रष्ट होने लगी ॥ २६ ॥
तां तु सेनां तदा भीमो दर्शयन् पाणिलाघवम् ।
शरैरवचकर्तोग्रैः प्रेषयिष्यन् यमक्षयम् ॥ २७ ॥
उस समय भीमसेन अपने हाथोंकी फुर्ती दिखाते हुए आपकी उस सेनाको यमलोक भेजनेके लिये भयंकर बाणोंद्वारा छिन्न-भिन्न करने लगे ॥ २७ ॥
तत्र भारत भीमस्य बलं दृष्ट्वातिमानुषम् ।
व्यभ्रमन्त रणे योधाः कालस्येव युगक्षये ॥ २८ ॥
भारत! उस समय प्रलयकालीन कालके समान भीमसेनके अलौकिक बलको देखकर रणभूमिमें सारे योद्धा इधर-उधर भटकने लगे ॥ २८ ॥
तथार्दितान् भीमबलान् भीमसेनेन भारत ।
दृष्ट्वा दुर्योधनो राजा इदं वचनमब्रवीत् ॥ २९ ॥
भरतनन्दन! भयंकर बलशाली अपने सैनिकोंको भीमसेनके द्वारा इस प्रकार पीड़ित देखकर राजा दुर्योधनने उनसे निम्नांकित वचन कहा ॥ २९ ॥
सैनिकांश्च महेष्वासान् योधांश्च भरतर्षभ ।
समादिशन् रणे सर्वान् हत भीममिति स्म ह ॥ ३० ॥
भरतश्रेष्ठ! उसने अपने महाधनुर्धर समस्त सैनिकों और योद्धाओंको रणभूमिमें इस प्रकार आदेश देते हुए कहा—'तुम सब लोग मिलकर भीमसेनको मार डालो ॥
तस्मिन् हते हतं मन्ये पाण्डुसैन्यमशेषतः ।
प्रतिगृह्य च तामाज्ञां तव पुत्रस्य पार्थिवाः ॥ ३१ ॥
भीमं प्रच्छादयामासुः शरवर्षैः समन्ततः ।
'उनके मारे जानेपर मैं सारी पाण्डव-सेनाको मरी हुई ही मानता हूँ।' आपके पुत्रकी इस आज्ञाको शिरोधार्य करके समस्त राजाओंने चारों ओरसे बाण-वर्षा करके भीमसेनको ढक दिया ॥ ३१ १/२ ॥
गजांश्च बहुला राजन् नरांश्च जयगृद्धिनः ॥ ३२ ॥
रथे स्थितांश्च राजेन्द्र परिवव्रुर्वृकोदरम् ।
राजन्! राजेन्द्र! बहुत-से हाथियों, विजयाभिलाषी पैदल मनुष्यों तथा रथियोंने भी भीमसेनको घेर लिया था ॥