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महाभारत (खंड २) - वन पर्व

महाभारत (खंड २) - वन पर्व

Mahabharata (Vol 2) - Vana Parva

by महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास

DevanagariSanskritpublished2,580 pages

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पुरा रामभयादेव तापस्यं समुपाश्रितम् ॥ ५६ ॥
वहाँ रावण अपने भूतपूर्व मन्त्री मारीचसे मिला, जो श्रीरामचन्द्रजीके भयसे ही पहलेसे उस स्थानमें आकर तपस्या करता था ॥ ५६ ॥

इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि रामोपाख्यानपर्वणि रामवनाभिगमने
सप्तसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्यायः ॥ २७७ ॥

इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत रामोपाख्यानपर्वमें श्रीरामवनगमनविषयक दो सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ २७७ ॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ५६ १/२ श्लोक हैं)