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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 93 of 404

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Page 93

भाषाटीकासमेत । (७६)
उड़द पीसा अन्न ( लड्डू घेवर गूंझा आदि ) नोनके गुडके तथा शाक आदि
ऐसे पदार्थ खानेसे मलकी कृमि प्रगट होती है। मांस मछली गुड दूध दही कांजी
ऐसे पदार्थ खानेसे कफकी कृमि पैदा होती है। विरुद्धपदार्थ जैसे दूध मछली और
आधा कच्चा आधा पक्का शाक जैसे हरा चनेका आदि ऐसे भोजनोंसे रुधिरजन्य
कृमि पैदा होती है ॥
पेटमें कृमि पडगई हों उसके लक्षण ।
ज्वरो विवर्णता शूलं हृद्रोगः सदनं भ्रमः ।
भक्तद्वेषोऽतिसारश्च संजातक्रिमिलक्षणम् ॥ ६ ॥
ज्वर हो, शरीरका रंग और प्रकारका होजावे, शूल, हृदय दूखे, वमनकीसी
इच्छा हो, भ्रम, भोजन बुरा लगे, दस्त होयें ये लक्षण जिसके पेटमें गिंडोहा आदि
कृमि पड जाती हैं उसको होते हैं ॥
कफकी कृमिके लक्षण ।
कफादामाशये जाता वृद्धाः सर्पन्ति सर्वतः ।
पृथुब्रध्ननिभाः केचित्केचिद्गण्डूपदोपमाः ॥ ७ ॥
रूढधान्याङ्कुराकारास्तनुदीर्घास्तथाऽणवः ।
श्वेतास्ताम्रावभासाश्च नामतः सप्तधा तु ते ॥ ८ ॥
अन्नादा उंदरावेष्टा हृदयादा महारुजः ।
चुरवो दर्भकुसुमाः सुगन्धास्ते च कुर्वते ॥ ९ ॥
हृल्लासमास्यस्रवणमविपाकमरोचकम् ।
मूर्च्छांच्छर्दितृषानाहकार्य्यश्वयथुपीनसान् ॥ १० ॥
कफसे आमाशयमें प्रगट हुई कृमियें जब बढ जाती हैं तब चारों तरफ डोलती
हैं, उनमेंसे कोई मोटी चामकी बाधीके सदृश, कोई गिंडोहेके आकार, कोई धान्यके
अँकुरके समान होती हैं। कितनी छोटी, बडी, चौडी होती हैं और किसीका वर्ण
श्वेत, किसीका तांबेके समान होता है। उन्होंके सात नाम हैं। सो इस प्रकार-
१ अन्नाद, २ उदरावेष्ट, ३ हृदयाद, ४ महारुज, ५ चुरु, ६ दर्भकुसुम और ७ सुगन्ध
ये नाम कोई सार्थक हैं और कोई निरर्थक हैं। व्यवहारके निमित्त पहले आचायोंने
कहे हैं। इन कृमियोंसे वमनकीसी इच्छा होय, मुखसे पानी गिरे, अन्नका पाक न
होवे, अरुचि, मूर्च्छा, वमन, प्यास, अफरा, शरीर कृश होवे, सूजन और पीनस
इतने विकार होते हैं ॥