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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 61 of 404

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Page 61

भाषाटीकासमेत । ( ४३ )
जो ज्वर बहुत प्रबल कारणोंसे उत्पन्न भया हो और जिसमें सम्पूर्ण लक्षण
मिलते हों वह ज्वर प्राणोंका हरण करनेवाला जानना और जो ज्वर प्रगट होते ही
चिकित्सा करते २ इन्द्रियोंकी शक्ति नष्ट कर दे अर्थात् अन्धा बहिरा इत्यादि वह
भी ज्वर असाध्य जानना ॥
ज्वरः क्षीणस्य शूनस्य गम्भीरो दैर्घ्यरात्रिकः ।
असाध्यो बलवान् यश्च केशसीमन्तकृज्ज्वरः ॥ ६५ ॥
जो पुरुष ज्वरसे क्षीण पडगया हो अथवा सूजन जिसके देहमें आगई हो वह
असाध्य है और जिसके ज्वर धातुके भीतर हो अथवा अन्तर्वेगज्वर अथवा जिसमें
वातादि दोषोंका निश्चय न होसके और बहुत दिनतक रहनेवाला ज्वर असाध्य होता
है और ज्वर बलवान् हो तथा जिसमें रोगी अपने हाथसे केशों ( बालों ) की
सीमन्त आदि रचना करे वह ज्वर असाध्य है ॥
गम्भीरज्वरके लक्षण ।
गम्भीरस्तु ज्वरो ज्ञेयो ह्यन्तर्दाहेन तृष्णया ।
आनद्धत्वेन चात्यर्थं श्वासकासोद्गमेन च ॥ ६६ ॥
अन्तर्दाह, प्यास, दोष अर्थात् विरुद्ध दोषके बढनेसे मलके रुकनेसे तथा श्वास
खांसीके उत्पन्न होनेसे गम्भीर ज्वर जानना ॥
दूसरे असाध्यज्वरके लक्षण ।
आरम्भाद्विषमो यस्य यस्य वा दैर्घ्यरात्रिकः ।
क्षीणस्य चातिरूह्क्षस्य गम्भीरो हन्ति मानवम् ॥ ६७ ॥
विसंज्ञस्ताम्यते यस्तु शेते निपतितोऽपि वा ।
शीतार्दितोऽन्तरुष्णश्च ज्वरेण म्रियते नरः ॥ ६८ ॥
जो ज्वर प्रगट होते ही विषम पड जांय और जो ज्वर बहुत दिनसे आया करे
और क्षीण तथा अतिरूक्ष देहवाले पुरुषके जो गम्भीर ज्वर हो वह मृत्युकारक
होता है और जो बेहोश होकर मोहको प्राप्त हो तथा गिरकर जिससे उठा न जाय
पडाही रहे अथवा बाहरी शीत लगे और देहके भीतर दाह हो ऐसे ज्वरवाला
पुरुष मरजावे ॥
और असाध्य लक्षण ।
यो हृष्टरोमा रक्ताक्षो हृदि संघातशूलवान् । वक्त्रेण चैवो-
च्छ्वसिति तं ज्वरो हन्ति मानवम् ॥ ६९ ॥ हिक्काश्वासतृषा-
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