माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in contextश्रीः ।
परिशिष्ट ( ग्रंथशेष ) ।
विदित हो कि माधवाचार्य भिषक्शिरोमणिजीने बहुतसे रोगोंके निदान स्वग्रन्थमें
नहीं लिखे परन्तु उन रोगोंके निदानोंसे बहुधा वैद्योंको काम पडता है, इसी
कारण उन निदानोंको अन्य ग्रन्थोंसे संग्रह करके इस जगह लिखते हैं । प्रथम
क्लीब ( नपुंसक ) का निदान चरकसे लिखते हैं ॥
क्लीबके लक्षण ।
रेतोदोषोद्भवं क्लैब्यं यस्माच्छुद्धैव सिध्यति ।
अतो वक्ष्यामि ते सम्यगग्निवेश यथातथम् ॥ १ ॥
बीजध्वजोपघाताभ्यां जरया शुक्रसंक्षयात् ।
वैक्लव्यसम्भवस्तस्य शृणु सामान्यलक्षणम् ॥ २ ॥
क्लैब्य ( नपुंसक होना ) केवल वीर्यके दोषसे होता है, वीर्य शुद्ध होनेसेही
उसकी शुद्धि है इसी कारण हे अग्निवेश ! मैं तेरे आगे क्लीबका लक्षण कहता हूं ।
नपुंसक चार प्रकारके होते हैं, उनको कहते हैं-१ बीजके उपघातसे, २ ध्वजोपघा-
तसे, ३ बुढापेसे और ४ शुक्र ( वीर्य ) के क्षय होनेसे जो नपुंसकता प्राप्त होती है
उसके सामान्य लक्षणको तू सुन ॥
क्लैब्यके सामान्य लक्षण ।
संकल्पप्रवणो नित्यं प्रियां वश्यामथापि वा ।
न याति लिङ्गशैथिल्यात्कदाचिद्याति वा पुमान् ॥ ३ ॥
श्वासार्त्तः स्विन्नगात्रांसो मोघसंकल्पचेष्टितः ।
म्लानशिश्नश्च निर्बीजः स्यादेतत्क्लैब्यलक्षणम् ॥ ४ ॥
प्रिय और वशीभूत स्त्रीको भी प्राप्त होकर जो पुरुष लिंगकी शिथिलता होनेसे
नित्य विषय न करे और कदाचित् करे तो जब कभी करे, वह पुरुष श्वाससे व्याकुल
हो, देहमें पसीना होय, निष्फलमनोरथ और चेष्टा ( विषयादि ) होय, लिंग जिसका
ढीला और बीजरहित होय ये नपुंसकके सामान्य लक्षण हैं ॥
बीजोपघात क्लीबके लक्षण ।
सामान्यलक्षणं ह्येतद्विस्तरेण प्रवक्ष्यते । शीतरूक्षाम्लसंक्लिष्ट-
विषमासात्म्यभोजनात् ॥ ५ ॥ शोकचिन्ताभयत्रासात्स्त्रीणां
चात्यर्थसेवनात् । अभिचारादविस्रम्भाद्रसादीनां च संक्ष-
यात् ॥ ६ ॥ वातादीनां च वैषम्याद्विरुद्धाध्यशनाच्छ्रमात् ।
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