Skip to content
SarvaKosh
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 383 of 404

Read in context
Page 383

भाषाटीकासमेत । ( ३६५ )
विषैले आखु ( मूसे ) के काटनेसे पीला रुधिर निकले, देहमें गोल चकत्ते
उठें, ज्वर होय, अरुचि होय, रोमांच और दाह होय, ये मूसेके काटनेके
विषपीडित मनुष्यके लक्षण हैं ॥
प्राणहरमूषकविषके लक्षण ।
मूर्च्छाऽङ्गशोथो वैवर्ण्यं क्लेदो मन्दश्रुतिर्ज्वरः ।
शिरोगुरुत्वं लालासृक्छर्दिश्वासाध्यमूषकैः ॥ ४५ ॥
जिस मूसेके काटनेसे मूर्च्छा, मूसेके आकार सूजन, देहमें विवर्णता, क्लेद, मन्द
सुनाई दे, ज्वर, मस्तक भारी, लार और रुधिर इनकी रद होय ये लक्षण प्राणहर्त्ता
मूसेके असाध्य हैं ॥
कृकलास ( सरट ) के काटेके लक्षण ।
कार्ष्ण्यं श्यावत्वमथवा नानावर्णत्वमेव च ।
व्यामोहो वर्चसो भेदो दष्टे स्यात्कृकलासकैः ॥ ४६ ॥
सरटके काटनेसे देहका वर्ण काला अथवा नीला हरा तथा अनेक प्रकारका होय
तथा उस रोगीको भ्रांति और अतिसार होय ॥
वृश्चिकविषके लक्षण ।
दहत्यग्निरिवाऽदौ तु भिनत्तीवोर्ध्वमाशु वै ।
वृश्चिकस्य विषं याति पश्चाद्दंशेऽवतिष्ठति ॥ ४७ ॥
बिच्छूके काटनेसे उस स्थानमें प्रथम अग्निसी चले पीछे ऊपरको चढे पीछे
काटनेकी जगह फटनेकीसी पीडा होय ॥ अब कहते हैं कि, विच्छू मन्दविष, मध्य-
विष, महाविषके भेदसे तीन प्रकारका है । तिनमें जो गौके गोबरसे प्रगट होय वह
मन्दविष हैं और काठ ईंट इनसे प्रगट होय वह मध्यविष हैं और जो सर्पकी सडी
देहसे प्रगट होय वह अथवा अन्य विषवाली वस्तुओंसे प्रगट होय वह विच्छू महा-
विषवाला होता है, मन्दविषवाले बारह प्रकारके हैं और मध्यविषवाले तीन प्रकारके
हैं और महाविषवाले पंद्रह प्रकारके हैं, ऐसे सब मिलकर तीस प्रकारके बिच्छू हैं ।
कोई आचार्य २७ प्रकारके कहते हैं । कृष्ण, श्याव, कर्बुर ( विचित्रवर्ण ), पीत,
गोमूत्राभ, कर्कश, मेचक, श्वेत, लाल, रोमश, शाद्वलाभ, रक्त ये बारह मन्दवीर्य हैं,
इनके काटनेसे पीडा, कंप, देहका स्तंभ, काले रुधिरका निकलना इत्यादि रोग
होते हैं । रक्तोदर, पित्तोदर, कपिलोदर ये तीन मध्य विषवाले विच्छू हैं, इनके
काटनेसे जीभमें सूजन, भोजनका न होना, घोर मूर्च्छा ये लक्षण होते हैं। श्वेत, चित्र,
श्यामल, लोहिताभ, रक्त, श्वेत, रक्तोदर, नीलोदर, रक्त, पीत, नीलपीत, रक्तनील,
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA