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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 382 of 404

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Page 382

( ३६४ ) माधवनिदान ।
उनके काटनेके सामान्य लक्षण ।
ताभिर्दष्टे दंशकोथः प्रवृत्तिः क्षतजस्य च ।
ज्वरो दाहोऽतिसारश्च गदाः स्युश्च त्रिदोषजाः ॥ ३८ ॥
पिडिका विविधाकारा मण्डलानि महांति च ।
शोथा महान्तो मृदवो रक्तश्यावाश्चलास्तथा ॥
सामान्यं सर्वलूतानामेतद्दंशस्य लक्षणम् ॥३९॥
उन मकडियोंके काटनेसे वह स्थान सडे और उसमेंसे रुधिर बहे, ज्वर, दाह
अतिसार और त्रिदोषज तथा अनेक प्रकारके फोडे, बडे बडे चकत्ते नरम लाल
काली नीली और चञ्चल ऐसी सूजन होय इत्यादि लक्षण होते हैं, इस प्रकार सब
लूताओंके सामान्य लक्षण जानने ॥
दूषीविषलूताके काटनेके लक्षण ।
दंशमध्ये तु यत्कृष्णं श्यावं वा जालकावृतम् ॥ ४० ॥
ऊर्ध्वाकृति भृशं पाकं क्लेदकोथज्वरान्वितम् ।
दूषीविषाभिर्लूताभिस्तं दष्टमिति निर्दिशेत् ॥ ४१ ॥
जिस दंशका मध्यभाग काला अथवा नीला अथवा हरा तथा जालके सदृश
ऊंचा होकर शीघ्र पके तथा उसमेंसे दुर्गन्धयुक्त लस बहे, उसमें ज्वर होय उसको
दूषीविष अथवा लूताका काटा हुआ जानना ।
प्राणहरलूताके लक्षण ।
सर्पाणामेव विण्मूत्रशवकोथसमुद्भवाः ।
दूषीविषाः प्राणहरा इति संक्षेपतो मताः ॥ ४२ ॥
शोथाः श्वेताऽसिता रक्ताः पीताः सपिडिका ज्वराः ।
प्राणान्तिकाभिर्जायन्ते दाहहिक्काशिरोग्रहाः ॥ ४३॥
सर्पोंके मलमूत्रसे अथवा मरे हुए सर्पके सडजानेसे जो दूषीविषके कीडे उत्पन्न
होयँ वे प्राण हरनेवाले होते हैं, उनका काटा हुआ स्थान सूज जावे तथा वह सफेद
काला लाल पीला होय और फुन्सी हो जायँ और रोगीको ज्वर आवे, दाह होय,
हिचकी आवे, मस्तकमें शूल होय ॥
दूषीविषाखुलक्षण ।
आदंशाच्छोणितं पाण्डु मण्डलानि ज्वरोऽरुचिः ।
लोमहर्षश्च दाहश्चाप्याखुदूषीविषार्दिते ॥ ४४ ॥
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