Skip to content
SarvaKosh
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

Report a copyright issue

DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 310 of 404

Read in context
Page 310

( २९२ ) माधवनिदान ।
परिदरके लक्षण ।
दन्तमांसानि शीर्यन्ते यस्मिन्ष्ठीव्यति चात्यसृक् ।
पित्तासृक्कफजो व्याधिर्ज्ञेयः परिदरो हि सः ॥ १७ ॥
इस रोगकरके दांतोंका मांस बिखर जाय और थूकनेसे रुधिर गिरे, इस व्याधिको
परिदर कहते हैं यह रोग पित्तरुधिरकफसे होय है ॥
उपकुशके लक्षण ।
वेष्टेषु दाहः पाकश्च ताभ्यां दन्ताश्चलन्ति च ।
अवाक्कृताः प्रस्रवन्ति शोणितं मन्दवेदनाः ॥ १८ ॥
आध्मायन्ते स्रुते रक्ते मुखे पूतिश्च जायते ।
यस्मिन्नुपकुशोनाम पित्तरक्तकृतो गदः ॥ १९ ॥
जिसके मसूढोंमें दाह होकर पाक और दांत हलने लगें, मसूढोंके घिसनेसे रुधिर
मन्द पीडाके साथ निकले, रुधिर निकलनेके पिछाडी फिर मसूढे फूल आवें और
मुखमें वास आवे इस पित्तरक्तकृत विकारको उपकुश कहते हैं ॥
वैदर्भके लक्षण ।
घृष्टेषु दन्तमूलेषु संरम्भो जायते महान् ।
भवन्ति चपला दन्ताः स वैदर्भोऽभिघातजः ॥ २० ॥
मसूढे रगड़नेसे सूजन बहुत होय और दांत हलने लगें, उसको वैदर्भरोग कहते
हैं। यह रोग चोटके लगनेसे होय है ॥
खलीवर्धनके लक्षण ।
मारुतेनाधिको दन्तो जायते तीव्रवेदनः ।
खल्लीवर्द्धनसंज्ञो वै जाते रुक्च प्रशाम्यति ॥ २१ ॥
वादीके योगसे दांतके ऊपर दूसरा दांत उगे, उस समय पीडाहोय, जब वह दांत
उग आवे तब पीडा शांत होय उसको खल्लीवर्धन कहते हैं ॥
करालके लक्षण ।
शनैः शनैः प्रकुरुते वायुर्दन्तसमाश्रितः ।
करालान्विकटान्दन्तान् करालो न च सिध्यति ॥ २२ ॥
वादी धीरे धीरे मसूढेका आश्रय लेकर दांतोंको टेढे तिरछे करे उसको कराल
रोग कहते हैं। यह रोग साध्य नहीं होय ॥
CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA