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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 309 of 404

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Page 309

भाषाटीकासमेत । ( २९१ )
जिसके मसूढोंमेंसे अकस्मात् रुधिर बहैं और दांतोंका मांस दुर्गन्धियुक्त काला
पीवसहित तथा नरम होकर गिरे और एक दांतका मसूढा पकनेसे वह दूसरे मसू-
ढेको पकावे, यह कफ रुधिरसे प्रगट व्याधिको शीतादनाम कहते हैं ॥
दन्तपुप्पुट के लक्षण ।
दन्तयोस्त्रिषु वा यस्य श्वयथुर्जायते महान् ।
दन्तपुप्पुटको नाम स व्याधिः कफरक्तजः ॥ १३ ॥
जिसके दो अथवा तीनों दांतोंकी जडमें महान् सूजन होय, उसको दंतपुप्पुट नाम
कहते हैं, यह व्याधि कफरक्तसे होती है, परन्तु आगे जो शौषिर रोग कहेंगे उससे
यह भिन्न है क्योंकि इसमें पीडा और लारका टपकना नहीं होता है ॥
दन्तवेष्टके लक्षण ।
स्रवन्ति पूयं रुधिरं चला दन्ता भवन्ति च ।
दन्तवेष्टः स विज्ञेयो दुष्टशोणितसंभवः ॥ १४ ॥
रुधिर दुष्ट होनेसे दांतोंमेंसे रुधिर तथा राध बहे, तथा दांत हिलने लगे उसको
दन्तवेष्टरोग कहते हैं ॥
शौषिरके लक्षण ।
श्वयथुर्दन्तमूलेषु रुजावान्कफरक्तजः ।
लालास्रावी स विज्ञेयः शौषिरो नाम नामतः ॥ १५ ॥
कफ रुधिरसे दांतोंकी जडमें सूजन होय, उसमें पीडा होय और स्राव होय
उसको शौषिर रोग कहते हैं। पूर्वोक्त दन्तपुप्पुटमें पीडा और स्राव नहीं होय है
इसीसे यह पृथक् है ॥
महाशौषिरके लक्षण ।
दन्ताश्चलन्ति वेष्टेभ्यस्तालु चाप्यवदीर्यते ।
यस्मिन्स सर्वतो व्याधिर्महाशौषिरसंज्ञकः ॥ १६ ॥
इस त्रिदोष व्याधिसे मसूढेके समीप दांत हालैं, तालुएमैं छिद्र पडे, चकारसे दांत
और होंठ भी फटजायँ उसको महाशौषिररोग कहते हैं। यह रोग मनुष्यको सात
दिनमें मारता है. सो भोजने कहाभी है परन्तु गदाधर कहते हैं कि, शौषिरमें जो
भोजने लक्षण कहे हैं सो होयँ तो उसीको महाशौषिर कहते हैं ॥
१ सदाहो दंतमूलेषु शोथः पित्तकफानिलात् । जातः कफं क्षपयति क्षीणे तस्मिन्सशोणि-
तम् ॥ विवृद्धमनिशं दंतास्ताल्वोष्ठमपि दारयेत् । महाशौषिरमित्येतत्सप्तरात्रान्निहंत्यसून ॥