माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
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Read in context( २७६ ) माधवनिदान ।
रसगत, रक्तगत, पित्तज, कफज, पित्तकफज ये मसूरिका सुखसाध्य हैं । ये
औषधके बिना भी शांत होती हैं ॥
कष्टसाध्य ।
वातजा वातपित्तोत्था वातश्लेष्मकृताश्च याः ।
कृच्छ्रसाध्या मतास्तास्तु यत्नादेता उपाचरेत् ॥ २४ ॥
वातज, वातपित्तज, वातकफज मसूरिका कष्टसाध्य हैं इनकी यत्नपूर्वक
चिकित्सा करे ॥
असाध्यमसूरिकाके लक्षण ।
असाध्याः सन्निपातोत्थास्तासां वक्ष्यामि लक्षणम् ।
प्रवालसदृशाः काश्चित्काश्चिज्जम्बूफलोपमाः ॥ २५ ॥
लोहजालसमाः काश्चिदतसीफलसन्निभाः ।
आसां बहुविधा वर्णा जायन्ते दोषभेदतः ॥ २६ ॥
सन्निपातज मसूरिका असाध्य हैं उनके लक्षण कहता हूं. कोई मूंगाके समान
लाल होंय, कोई जामुनके समान और कोई लोहजालके समान तथा अलसीके
बीजके समान होती हैं । दोषोंके भेद करके इनके अनेक प्रकारके रंग होते हैं ॥
सर्वमसूरिकाके अवस्थाविशेषकरके लक्षण ।
कासो हिक्काथ मोहश्च ज्वरस्तीव्रः सुदारुणः ।
प्रलापारतिमूर्च्छाश्च तृष्णा दाहोऽतिघूर्णता ॥ २७ ॥
मुखेन प्रस्रवेद्रक्तं तथा घ्राणेन चक्षुषा ।
कण्ठे घुर्घुरकं कृत्वा श्वसित्यत्यर्थदारुणम् ॥ २८ ॥
मसूरिकाभिभूतो यो भृशं घ्राणेन निश्श्वसेत् ।
स भृशं त्यजति प्राणांस्तृष्णार्तो वायुदूषितः ॥ २९ ॥
खांसी, हिचकी, मोह, तीव्रज्वर, प्रलाप, असन्तोष, मूर्च्छा, प्यास, दाह, नेत्र टेढे
तिरछे बांके फटेसे ये लक्षण होते हैं, मुख, नाक और नेत्र इनके मार्ग होकर रुधिर
गिरे, कण्ठमें घुरघुर शब्द होय और भयंकर श्वास ले, जो मसूरिकापीडित रोगी
केवल नाकके द्वारा श्वास लेय, वह पुरुष वायु और तृषा इनसे पीडित होकर तत्काल
प्राणत्याग करे ॥