माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
by माधवकर
Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)
Page 293 of 404
Read in contextभाषाटीकासमेत । ( २७५ )
मेदोगत मसूरिका मण्डलके आकार अर्थात् गोल, नरम, कुछ ऊंची, मोटी तथा
काली होती हैं, इनके होनेसे भयंकर ज्वर, पीडा, इंद्रिय मनको मोह, चित्तका
अस्थिर होना, सन्ताप ये लक्षण होते हैं। इन मसूरिकासे कोई मनुष्य बचता होगा
इससे यह दिखाया कि, ये अत्यन्त कृच्छ्रसाध्य हैं ॥
अस्थिमज्जागतके लक्षण ।
क्षुद्रा गात्रसमारूढाश्चिपिटाः किंचिदुन्नताः ।
मज्जोत्था भृशसम्मोहवेदनारतिसंयुताः ॥ १८ ॥
छिन्दंति मर्मधामानि प्राणानाशु हरंति ताः ।
भ्रमरेणेव विद्धानि भवन्त्यस्थीनि सर्वतः ॥ १९ ॥
अस्थि मज्जागत मसूरिका बहुत छोटी, देहके समान, रूक्ष, चिपटी, कुछ ऊँची
होय हैं, अत्यन्त चित्तविभ्रम, पीडा, अस्वस्थता ये होते हैं, वह मर्मस्थानोंके भेद
करके शीघ्र प्राणहरण करें इसके होनेसे हड्डियोंमें भौंरेके काटनेके समान पीडा होय है ॥
शुक्रगतके लक्षण ।
पक्वाभाः पिडिकाः स्निग्धाः श्लक्ष्णाश्चात्यर्थवेदनाः ।
स्तैमित्यारतिसंमोहदाहोन्मादसमन्विताः ॥ २० ॥
शुक्रजायां मसूर्या तु लक्षणानि भवन्ति च ।
निर्दिष्टं केवलं चिह्नं दृश्यते न तु जीवितम् ॥ २१ ॥
शुक्रधातुगत मसूरिका पकेके समान चिकनी अलग अलग होय हैं, इनमें अत्यन्त
पीडा होय, इनके होनेसे गीलापना, अस्वस्थता, पीडा, मोह, दाह, उन्माद ये लक्षण होते
हैं, रोगी बचे ऐसे इसमें कोई लक्षण नहीं दीखे इसीसे इसको असाध्य जानना ॥
सप्तधातुगतमसूरिकाके दोषके सम्बन्धसे लक्षण कहते हैं-
दोषमिश्रास्तु सप्तैता द्रष्टव्या दोषलक्षणैः ।
ये सप्तधातुगत मसूरिका वातादिकोंके लक्षणों करके तीन दोषोंकरके मिश्रित,
प्रगट भई जाननी ॥
धातुगत और दोषज मसूरिकामें कौन साध्य हैं ? सो कहते हैं-
त्वग्गता रक्तजाश्चैव पित्तजाः श्लेष्मजास्तथा ॥ २२ ॥
पित्तश्लेष्मकृताश्चैव सुखसाध्या मसूरिकाः ।
एता विनापि क्रियया प्रशाम्यंति शरीरिणाम् ॥ २३ ॥