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माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

by माधवकर

Source: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (origin)

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DevanagariSanskritpublished404 pages

Page 240 of 404

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Page 240

( २२२ ) माधवनिदान ।
जो श्लीपद कफकारक आहार विहारसे प्रगट भया तथा कफप्रकृतिवाले पुरुषके
कफसे प्रगट भया होय, तथा स्रावयुक्त तथा जिस दोषसे प्रगट भया होय उस
दोषके लक्षण उसमें बढ़ गये होयँ, जिसमें खुजली बहुत होय और कफयुक्त होय
सो श्लीपदरोगी वैद्यकरके त्याज्य है ॥
इति श्रीपण्डितदत्ताराममाथुरानिर्मितमाधवार्थबोधिनीमाथुरीभाषाटीकायां
श्लीपदनिदानं समाप्तम् ॥
अथ विद्रधिनिदानम् ।
त्वग्रक्तमांसमेदांसि प्रदुष्यास्थिसमाश्रिताः ।
दोषाः शोथं शनैर्घोरं जनयन्त्युच्छ्रिता भृशम् ॥ १ ॥
महाशूलं रुजावन्तं वृत्तं वाप्यथवायतम् ।
स विद्रधिरिति ख्यातो विज्ञेयः षड्विधश्च सः ॥ २ ॥
पृथग्दोषैः समस्तैश्च क्षतेनाप्यसृजा तथा ।
षण्णामपि हि तेषां तु लक्षणं संप्रचक्षते ॥ ३ ॥
अत्यन्त बढ़े तथा अस्थि ( हड्डी ) का आश्रय करके रहनेवाले वातादिदोष त्वचा,
रुधिर, मांस और मेद इनको दुष्ट कर धीरे धीरे भयंकर शोथ उत्पन्न करे, उसकी जड
हड्डीपर्यन्त पहुँच जाय, उत्पत्तिकालमें अत्यंत पीडाकारक तथा गोल अथवा लंबा
जो शोथ ( सूजन ) होय उसको विद्रधि कहते हैं पृथक् दोषोंसे ३, सन्निपातसे १,
क्षत ( घाव ) से १ और रुधिरसे १ मिलकर छः प्रकारकी विद्रधि होय हैं, उन
छःहों विद्रधिके लक्षण कहते हैं ॥
वातजविद्रधिके लक्षण ।
कृष्णोऽरुणो वा विषमो भृशमत्यर्थवेदनः ।
चित्रोत्थानप्रपाकश्च विद्रधिर्वातसंभवः ॥ ४ ॥
जो विद्रधि काली लाल विषम कहिये कदाचित् छोटी कदाचित् मोटी हो
अत्यन्त वेदनायुक्त और उसका प्रगट होना तथा पाक ये नाना प्रकारके होयँ
उसको वातविद्रधि कहते हैं ॥
पित्तकी विद्रधिके लक्षण ।
पक्वोदुम्बरसंकाशः श्यावो वा ज्वरदाहवान् ।
क्षिप्रोत्थानप्रपाकश्च विद्रधिः पित्तसंभवः ॥ ५ ॥
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